सेना को मिली छूट, उग्रवादियों का करो खात्मा
भारत-म्यांमार सीमा पर पूर्वोत्तर के उग्रवादियों के खिलाफ सेना की कार्रवाई जारी रहेगी। मंगलवार तड़के म्यांमार सीमा के भीतर किए गए ऑपरेशन में मिली जबरदस्त सफलता के बाद नई कार्रवाई की योजना बनाई जा रही है। सेना को सरकार की ओर से म्यांमार के जंगलों में छिपे सभी भारत विरोधी संगठनों के कैंपों को नेस्तनाबूद करने की खुली छूट दे दी गई है।
खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक म्यांमार सीमा के भीतर सामरिक लिहाज से अतिसंवेदनशील ठिकानों पर उग्रवादियों के 61 बड़े कैंप हैं। इसके लिए म्यांमार सरकार से नए सिरे से बातचीत की जा रही है, ताकि सेना उग्रवादियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई को अंजाम दे सके। जंगलों में म्यांमार सेना के साथ साझा कार्रवाई पर बातचीत के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल जल्द पड़ोसी देश जाएंगे।
सीमा पार म्यांमार में उग्रवादियों के 61 कैंप
अजीत डोभाल और सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह अंजाम पर पहुंचने तक पूरी कार्रवाई का साझा संचालन करेंगे। इनके निशाने पर अलग-अलग उग्रवादी संगठनों के एसएस केपलांग और परेश बरुआ जैसे नेता भी हैं। सेना के उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक मंगलवार तड़के करीब तीन बजे सुबह शुरू किया गया ऑपरेशन करीब 45 मिनट तक चला था।
जोरहाट स्थित 21 पारा स्पेशल फोर्स रेजिमेंट के सधे हुए कमांडो ने दो अलग-अलग कैंपों पर एक साथ ऐसा हमला बोला कि उग्रवादियों की ओर से एक भी गोली नहीं चल सकी। सेना का आकलन है कि इस हमले में सौ से भी ज्यादा उग्रवादी मारे गए हैं। हालांकि, अब तक करीब 40 के मारे जाने की ही पुष्टि हुई है।
सूत्रों के मुताबिक हमले के वक्त दोनों कैंपों में करीब 150 उग्रवादी थे। इस हमले में घायल छह उग्रवादियों को म्यांमार के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डोभाल और विदेश मंत्रालय के स्तर पर इनसे पूछताछ की भी व्यवस्था की जा रही है।
ऑपरेशन खत्म होने के बाद मिली म्यांमार सरकार को जानकारी
सूत्रों ने बताया कि ताजा ऑपरेशन के लिए म्यांमार की एजेंसियों से सेना संपर्क में थी। लेकिन, विदेश मंत्रालय की मदद से वहां की सरकार को ऑपरेशन की औपचारिक जानकारी मंगलवार को करीब नौ बजे मिली। तब तक पूरी कार्रवाई खत्म हो चुकी थी। सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के बीच हुए करार के तहत सेना म्यांमार सीमा में घुसकर कार्रवाई कर सकती है।