सरकार का दावा, कॉल ड्राप की समस्या में हुआ सुधार
आम जनता को कॉल ड्रॉप के मामले में बेशक अभी सुखद अनुभूति का अहसास नहीं हुआ हो लेकिन सरकार का दावा है कि कॉल ड्राप की समस्या में कमी आई है।
दरअसल संचार मंत्रालय ने एक स्वतंत्र एजेंसी के जरिये दिल्ली और मुंबई में कॉल ड्राप की समस्या को लेकर उपभोक्ताओं के बीच एक सर्वे किया था। इसकी रिपोर्ट मंत्रालय के लिए संतोषजनक है।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कॉल ड्राप पर चिंता जता चुके हैं और बिहार चुनाव के दौरान विपक्ष ने भाजपा के खिलाफ इसे सियासी मुद्दा भी बनाया था।
कराया था सर्वे
कॉल ड्राप से 54,000 करोड़ रुपये के वित्तीय बोझ की खबरों को खारिज
करते हुए केंद्रीय संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि मीडिया ने
वित्तीय बोझ के बारे में बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया है।
संचार मंत्रालय के एक
शीर्ष अधिकारी के अनुसार, नेटवर्क की स्थिति में सुधार के आकलन के लिए
सरकार ने सितंबर में दिल्ली और मुंबई में सर्वे करवाया था। इसकी रिपोर्ट
में सरकार को कुछ सेवा प्रदाताओं की स्थिति में सुधार होता नजर आया है।
इससे पहले जून-जुलाई में सरकार ने इन शहरों में सर्वे करवाया था।
हालांकि,
ट्राई ने कॉल ड्रॉप के कारण सेवा प्रदाताओं के लाभ का आकलन करने के लिए
मूल्यवर्द्धित सेवाओं की कोई जांच नहीं की है।सरकार का कहना है कि
स्पेक्ट्रम की आवृत्तियों में परिवर्तन, इस्तेमाल में बदलाव और टावरों की
कमी से कॉल ड्रॉप होती है। नेटवर्क विस्तार एक सतत प्रक्रिया है और संचार
सेवा के प्रदाताओं ने सघन तौर पर सुधार प्रारंभ कर दिया है।