तीन 'महाशक्तियों' से हॉटलाइन से जुड़ेंगे मोदी
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अब भारत के प्रधानमंत्री तीन शक्तिशाली देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ सीधे हॉटलाइन से जुड़े रहेंगे। प्रधानमंत्री रूस और चीन के राष्ट्राध्यक्षों से पहले से हॉटलाइन से जुड़े हैं। अब बराक ओबामा की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान हुए फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टेबल पर एक और हॉटलाइन फोन लगने वाला है।
इस लाइन के जरिए वह नाभिकीय हमले या किसी गलतफहमी जैसे संवेदनशील हालात में सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति से बातचीत कर सकेंगे। हालांकि नाभिकीय बम से लैंस पड़ोसी देश पाकिस्तान के राष्ट्राध्यक्ष के साथ प्रधानमंत्री के सीधे संवाद का कोई जरिया अब तक नहीं स्थापित हो पाया है।
ओबामा की यात्रा के दौरान दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) का हॉटलाइन से जुड़ना भी सुरक्षा की दृष्टि से अहम माना जा रहा है। अब भारत और अमेरिका के एनएसए सरकारी प्रोटोकॉल को छोड़ खुफिया संबंधी संवेदनशील जानकारी का सीधा आदान-प्रदान कर सकेंगे।
पीएम, एनएसए स्तर पर होगी अमेरिका से सीधी बातचीत
गौरतलब है कि मोदी और ओबामा ने आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा संबंधी अहम करार किए हैं। इसमें लश्कर-ए-ताइबा, जैश-ए-मोहम्मद, हक्कानी गुट, दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी सहित अल-कायदा और आईएसआईएस को दुनिया के किसी कोने में अपनी जमीन मजबूत नहीं करने देने के लिए योजनाओं पर हस्ताक्षर शामिल हैं।
इसमें ईरान, खाड़ी के देशों और अफगानिस्तान में हो रही गतिविधियां भी अहम हैं। भारत और चीन के बीच विदेश मंत्री स्तर पर हॉटलाइन 2005 में स्थापित हुआ था। 2009 में दोनों देशों ने चीनी प्रीमीयर और भारतीय प्रधानमंत्री के बीच हॉटलाइन की व्यवस्था कर ली।
इसी तरह रूस के साथ भी 2009 में राष्ट्राध्यक्षों के बीच सीधी बातचीत का लाइन बिठा दिया गया था। अब अमेरिका के साथ हुए करार के बाद भारत के प्रधानमंत्री दुनिया के तीन बड़ी ताकत के प्रमुखों के साथ सीधे फोन लाइन से जु़ड़ गए हैं।
पाकिस्तान के साथ फिलहाल विदेश मंत्री, गृहमंत्री और मिलिट्री ऑपरेशन के महानिदेशकों के बीच ही हॉटलाइन की व्यवस्था है, जबकि दोनों देशों के परमाणु शक्ति होने की वजह से उनके राष्ट्राध्यक्षों के बीच हॉटलाइन जरूरी है।