सरकार ने कहा देवदासी प्रथा होगी खत्म, कोर्ट ने लगाया जुर्माना
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देवदासी प्रथा को समाप्त करने की गुहार संबंधी याचिका पर समय पर जवाब नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना किया है।
न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति यूयू ललित की सामाजिक न्यायपीठ ने केंद्र सरकार पर जुर्माना लगाते हुए जवाब देने केलिए एक और मौका दिया है। पीठ ने सरकार को चार हफ्ते के भीतर हलफनामे के जरिए अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। इससे पहले केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने भी पीठ के सामने अपना पक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि हलफनामा तैयार किया गया था लेकिन उनके मुताबिक वह संतोषजनक नहीं था। यहीं कारण है कि हलफनामा दायर नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान पिंकी आनंद ने यह भी कहा कि देवदासी प्रथा को जाना है।
'देवदालिसियों को किया जाता है भगवान के सुपुर्द'
अदालत एसएम फाउंडेशन द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वकील ने पीठ से कहा कि अदालत को इस मामले में जल्द कुछ करने की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि हर वर्ष 15 फरवरी को देवादासियों को भगवान को सुपुर्द किया जाता है। जिसके बाद अदालत ने जनवरी महीने में सुनवाई करने का निर्णय लिया। अदालत ने कहा कि पहले केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए फिर देखते हैं इस पर क्या किया जा सकता है।