मोदी सरकार इन दस क्षेत्रों में रिसर्च पर करेगी करोड़ों खर्च
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देश में ‘इंप्रिंट इंडिया’ के तहत समाज की जरूरतों के मद्देनजर दस क्षेत्रों में अनुसंधान पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाएंगे। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बृहस्पतिवार को ‘इंप्रिंट इंडिया’ का शुभारंभ किया।
यह देशभर के भारतीय तकनीकी संस्थान (आईआईटी) और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएस) की ओर से अनुसंधान के क्षेत्र में संयुक्त पहल है। इस पहल के तहत उन अहम क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जिनमें शोध की सख्त जरूरत है।
इस योजना का उद्देश्य पहचान किए गए क्षेत्रों में वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए आर्थिक सहायता सुनिश्चित करना और साथ ही ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में जीवनस्तर को बढ़ाने की कोशिश करना है।
‘इंप्रिंट इंडिया’ के तहत दस विषय वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इनमें से प्रत्येक का समन्वय एक आईआईटी या आईआईएससी द्वारा किया जाएगा।
इसके तहत स्वास्थ्य देखभाल-आईआईटी खड़कपुर, कम्प्यूटर साइंस एवं आईसीटी- आईआईटी खड़गपुर, एडवांस मैटिरियल्स- आईआईटी कानपुर, जल संसाधन एवं नदी प्रणाली- आईआईटी कानपुर, सतत शहरी डिजाइन-आईआईटी रुड़की, प्रतिरक्षा एवं विनिर्माण- आईआईटी मद्रास, नैनो टेक्नोलॉजी हॉर्डवेयर- आईआईटी बांबे, पर्यावरण विज्ञान एवं जलवायु परिवर्तन, आईआईएससी, बंगलूरू और ऊर्जा सुरक्षा की जिम्मेदारी आईआईटी बांबे को दी गई है।
आईआईटी और आईआईएस समाज की जरूरतों के लिए करेंगे अनुसंधान
इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों द्वारा किये गये अनुसंधान को अनिवार्य रूप से बड़े पैमाने पर समाज की तात्कालिक जरूरतों के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि अगर उच्चतर शिक्षा के संस्थान एक साथ आ जाएं तो वे कम ही समय में हमारे देश में उच्चतर शिक्षा क्षेत्र में बड़ा अंतर पैदा कर सकते हैं।
उन्होंने सामाजिक क्षेत्र एवं मानविकी क्षेत्र में संस्थानों के शैक्षणिक प्रमुखों से सार्वजनिक नीति निर्माण के लिए महत्वपूर्ण विषय वस्तुओं पर अनुसंधान करने के लिए ‘इंप्रिंट इंडिया’ जैसी संयुक्त पहल की रूपरेखा बनाने की अपील की।