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सस्ती होगी महंगी दालें, 70 लाख टन दाल आयात करेगी सरकार

Thu, 11 Jun 2015 08:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 11 Jun 2015 08:48 AM IST
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the government will import 70 lakh tonnes of pulses

सरकार महंगी दालों की समस्या से निपटने के लिए कमर कसने लगी है। लगातार महंगी होती दालों की कीमतों पर काबू पाने के लिए अब वह इसका ज्यादा आयात कर सकती है। दालों की बढ़ती हुई कीमत और मांग के मुकाबले उत्पादन में कमी को देखते हुए सरकार यह कदम उठा रही है। बुधवार को कैबिनेट कमेटी की बैठक में दाल की बढ़ती कीमतों को लेकर विचार-विमर्श किया गया।

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कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि कैबिनेट की बैठक में दाल की बढ़ती कीमत पर चर्चा की गई और इस पर चिंता जताई गई। गडकरी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दाल के भाव को काबू में रखने के लिए काफी मात्रा में दाल आयात करने का निर्देश दिया है।
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कृषि मंत्रालय के मुताबिक नेफेड व भारत सरकार ने राज्यों से पत्राचार में कहा है कि वे नेफेड से सीधे तौर पर दालों की खरीद कर सकते हैं। अभी तक सिर्फ तमिलनाडु द्वारा 232 टन तुअर की मांग की गई है और अन्य राज्यों की तरफ से दाल की कोई मांग नहीं की गई है। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि सरकार दलहन का पर्याप्त आयात भी कर रही है।

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तो खरीदनी होगी 60-70 लाख टन दाल

the government will import 70 lakh tonnes of pulses

औद्योगिक संगठन एसोचैम के मुताबिक दाल के दाम को नियंत्रण में रखने के लिए सरकार को इस साल 60-70 लाख टन दाल का आयात करना पड़ेगा। एसोचैम का यह भी कहना है कि समय रहते दाल का आयात नहीं किया गया तो दाल की कीमत बेकाबू हो सकती है।

दाल की कीमत में पिछले दो महीनों के दौरान 40 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और अरहर व उड़द जैसी दाल की कीमत 120 रुपये प्रति किलोग्राम हो चली है। रबी के दौरान बेमौसम की बारिश से लगभग 22 लाख टन दाल की फसल प्रभावित हुई है जिससे दाल की मांग व आपूर्ति का अंतर इस साल 70 लाख टन तक हो सकता है।

भारत में सबसे अधिक मध्य प्रदेश में 24 फीसदी, उत्तर प्रदेश में 16 फीसदी, महाराष्ट्र में 14 फीसदी, आंध्र प्रदेश में 10 फीसदी, कर्नाटक में 7 फीसदी तो राजस्थान में 6 फीसदी दाल का उत्पादन किया जाता है। बची हुई दाल की खेती गुजरात, छत्तीसगढ़, बिहार, उड़ीसा व झारखंड में की जाती है।

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