संसद में घिरी सरकार अब उठाएगी ये कदम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नरेंद्र मोदी सरकार अपने आर्थिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कोई भी हद पार करने के लिए तैयार है। राज्यसभा में धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री के बयान की मांग पर अड़े विपक्ष के साथ गतिरोध को दूर करने के लिए सरकार ने बातचीत का रास्ता नहीं छोड़ा है। लेकिन विपक्ष नहीं माना तो सरकार अपने आर्थिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के दूसरे विकल्पों की ओर इशारा कर रही है।
बीमा और कोयला क्षेत्र में सुधारों को लेकर सरकार अध्यादेश लाने की ओर संकेत कर रही है। शनिवार को वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि सरकार बीमा क्षेत्र में सुधार करने के लिए प्रतिबद्घ है और राजनीतिक गतिरोध पैदा कर इसे रोका नहीं जा सकता। उधर, सरकार के कड़े रुख का जवाब देते हुए विपक्ष ने भी कहा है कि सरकार चाहे जो कर ले मगर प्रधानमंत्री के बयान देने के बाद ही राज्यसभा में कामकाज आगे बढ़ पाएगा। कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री को बयान देना पड़ेगा। सोमवार को समूचा विपक्ष जोर- शोर से इसकी मांग करेगा।
विपक्ष ने कहा है कि वह सोमवार को संघ प्रमुख मोहन भागवत के ताजा विवादित बयान को लेकर प्रधानमंत्री से जवाब मांगेगा। जदयू सांसद के सी त्यागी ने कहा कि भागवत ने कहा है कि हिंदुओं के बिना किसी का कल्याण नहीं है। उधर, शनिवार को सरकार दो तरह के संकेत देते हुए दिखी। सरकार ने बीमा और कोयला क्षेत्र को किसी भी सूरत में आगे बढ़ाने के संकेत दिए तो साथ ही विपक्ष को मनाने के लिए बातचीत की भी बात कही। संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने शनिवार को कहा कि विपक्ष से बातचीत चल रही है। हमें उम्मीद है कि कोई न कोई हल निकलेगा। हल नहीं निकलने की स्थिति में सरकार का अगला कदम क्या होगा। इसके जवाब में नकवी ने कहा कि सरकार ने हर विकल्प खुले रखे हैं। सरकार का एक खेमा सरकार के आर्थिक सुधार को आगे बढ़ाने के लिए विशेष सत्र बुलाने की ओर भी संकेत दे रहे हैं।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दोहराया संकल्प
संसद का शीतकालीन सत्र भले ही अवसान पर हो और विपक्ष के असहयोग की वजह से कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर काम आगे नहीं बढ़ रहा हो, लेकिन सरकार आर्थिक सुधार पर आगे बढ़ने के प्रति आश्वस्त है।
इसका अंदाजा केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली के उस बयान से मिलता है, जो उन्होंने देश के अग्रणी उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए दिया। उन्होंने कहा है कि चाहे राजनीतिक गतिरोध क्यों न हों लेकिन आर्थिक सुधारों से सरकार पीछे हटने वाली नहीं है।
उद्योग संगठन फिक्की की वार्षिक आम बैठक को यहां शनिवार को संबोधित करते हुए जेटली ने कहा कि आर्थिक सुधार की दिशा में राजनीतिक दल बाधा डालते रहें, लेकिन इससे सरकार के मंसूबे में कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है क्योंकि संवैधानिक तंत्र में कई ऐसे उपाय हैं जिनसे इस तरह के अवरोधों पर पार पाया जा सकता है।
गौरतलब है कि बीमा विधेयक के मसौदे को मंत्रिमंडल ने 10 दिसंबर को ही अनुमोदित कर दिया था लेकिन इसे राज्यसभा में पेश नहीं किया जा सका है। धर्मांतरण के मुद्दे पर राज्य सभा में पिछले सप्ताह काम लगभग बाधित रहा। इसी तरह कोयला विधेयक लोकसभा से पारित हो चुका है लेकिन आगे कुछ नहीं हो पाया है।
विपक्ष को मनाने की भी कोशिश
जेटली ने कहा कि इस बारे में सभी शंकाओं का समाधान किया जा चुका है लेकिन विपक्षी दल इस पर चर्चा शुरू ही नहीं होने दे रहे हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों को खोलने के शुरुआती परिणाम बेहद उत्साहवर्द्धक रहे हैं और जितना हो सकेगा, उतने क्षेत्रों को खोला जाएगा। बीमा क्षेत्र को भी खोलने के लिए हमलोग इंतजार कर रहे हैं। सरकार इस बारे में कृत संकल्प है और इस तरह के राजनीतिक गतिरोध से सुधार रुकने वाला नहीं है।
सरकार आर्थिक सुधारों से जुड़े बिलों को पारित कराने के लिए अध्यादेश ला सकती है। सरकार का कहना है कि अगर विपक्षी दल राजनीतिक गतिरोध पैदा करते रहे तो वह बीमा और कोयला विधेयकों पर अध्यादेश देश का रास्ता अपना सकती है। हालांकि सरकार विपक्षी दलों को मनाने में भी लगी है।
संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने शनिवार को कहा कि विपक्ष से बातचीत चल रही है। हमें उम्मीद है कि कोई न कोई हल निकलेगा। हल न निकलने की स्थिति में सरकार का अगला कदम क्या होगा। इस पर नकवी ने कहा कि सरकार हर विकल्प खुला रखेगी।