किताब पर बैन लगा राजीव सरकार ने की थी गलती
पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने मशहूर लेखक सलमान रुश्दी के विवादित उपन्यास ‘द सैटेनिक वर्सेस’ पर प्रतिबंध लगाए जाने के 27 साल बाद कहा है कि यह राजीव सरकार की गलती थी। चिदंबरम उस समय 1986-89 के दौरान राजीव सरकार में गृह राज्य मंत्री थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाए जाने पर 1980 में गलती स्वीकार की थी।
लिटफेस्ट के दौरान चिदंबरम ने कहा, ‘मुझे यह कहते हुए कोई झिझक नहीं है कि 1988 में सलमान रुश्दी की किताब पर प्रतिबंध लगाना गलत था। जब उनसे यह पूछा गया कि उन्होंने इस निष्कर्ष पर पहुंचने में इतना समय क्यों लिया तो उन्होंने कहा, ‘यदि आप मुझसे 20 साल पहले भी पूछते तो मैं यही कहता।’
इंदिरा गांधी की ओर से थोपी गई इमरजेंसी को गलत ठहराने के सवाल पर चिदंबरम ने कहा, ‘इंदिरा गांधी ने स्वयं 1980 में यह स्वीकार किया था कि इमरजेंसी गलत थी और यदि वह दुबारा सत्ता में आती हैं तो वह कभी इमजेंसी नहीं लगाएंगी। लोगों ने उन पर विश्वास किया और उन्हें दुबारा सत्ता के लिए चुना।’
कहा, 1980 में इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी पर स्वीकार की थी गलती
देश में कथित रूप से बढ़ती असहिष्णुता के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘यह बढ़ रहा है और आशा जताई कि यह ‘नैतिक बहुसंख्यकवाद’ व्यापक रूप से असफल होगा।’
उन्होंने कहा कि मेरे लिए गहरी चिंता का विषय है कि असहिष्णुता में स्पष्ट रूप से बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने कहा कि खाप पंचायतें आज गैरकानूनी न्याय करती हुई नजर आ रही है।
चिदंबरम ने कहा, ‘मेरा दृढ़ विश्वास है कि संविधान अनुदार चुनौतियों से निपटने में सबसे अधिक शक्तिशाली है। संविधान के प्रावधानों को लागू करने से इन अनुदार प्रवृतियों पर नकेल कसी जा सकती है। यदि कानून संविधान की भावना के अनुरूप बनाए जाएं तो स्वतंत्रता की वास्तव में रक्षा की जा सकती है।’