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सरकार ने बताया, पाक में बंद 54 भारतीयों की मौत

Wed, 02 Sep 2015 09:04 AM IST
Updated Wed, 02 Sep 2015 09:04 AM IST
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The government said 54 Indians were killed in Pakistani jails

पाकिस्तान की जेलों में बंद 54 भारतीय युद्धबंदियों के बारे में किसी तरह की जानकारी देने में असहाय केंद्र सरकार का मानना है कि इन सभी की मौत हो गई है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सवाल के जवाब में यह बात कही है। शीर्ष अदालत ने इन युद्धबंदियों की स्थिति के बारे में पूछा था।

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अदालत ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान पूछा कि क्या 54 युद्धबंदी अभी जिंदा हैं। सरकार इस बारे में क्या सोचती है। इस पर विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि हमें इस बारे में जानकारी नहीं है।
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हमारा मानना है कि इन सभी की मौत हो गई होगी क्योंकि पाकिस्तान इन लोगों के कैद में होने की बात से इनकार कर रहा है। इस पर अदालत ने सरकार को इन युद्धबंदियों के आश्रितों को वेतन और सेवानिवृत्ति सुविधाएं देने के लिए कहा। जवाब में सरकार ने कहा कि सभी सुविधाएं दी जा चुकी हैं।
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अदालत ने सरकार से पूछा सवाल

The government said 54 Indians were killed in Pakistani jails

अदालत के यह सवाल उठाने पर कि भारत युद्धबंदियों के मसले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में क्यों नहीं ले जाता, सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सरकार सैन्य संबंधी विवाद में मध्यस्थता नहीं चाहती है।

इस पर जब पीठ ने दोनों देशों के बीच हुए नदी विवाद का मसला आईसीजे में जाने का जिक्र किया तो सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि  यह पहल पाक द्वारा की गई थी। हमने मध्यस्थता से इनकार कर दिया था।

इसके बाद अदालत ने युद्धबंदियों, कारगिल युद्ध के दौरान कैप्टन सौरभ कालिया की पाक सेना द्वारा निर्दयतापूर्वक हत्या और वर्ष 2013 में पाकिस्तानी सेना द्वारा दो भारतीय सैनिकों के सिर काटने के मामले से संबंधित तीन याचिकाओं पर सुनवाई टाल दी।

अदालत इस बात पर गौर कर रही है कि भारत को इस मसले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में लेकर जाने का निर्देश दिया जाना चाहिए या नहीं।

तीन सैनिकों की पहचान भी संभव नहीं
ये 54 युद्धबंदी में से सेना के 27, वायु सेना के 24 और नौसेना के दो जवान हैं। एक जवान सीमा सुरक्षा बल का है। केंद्र सरकार के हलफनामा के अनुसार ये सभी जवान 1965 और 1971 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध के बाद से लापता हैं।

इनमें तीन सैनिकों की पहचान भी संभव नहीं हो पा रही है क्योंकि उनके सर्विस रिकार्ड, यूनिट और परिवार के बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है।

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