मुस्लिम संगठनों के दबाव में योग दिवस पर फैसला
सरकार ने आखिरकार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर सूर्य नमस्कार करने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। कुछ दलों और मुस्लिम संगठनों की आपत्तियों को देखते हुए केंद्र ने स्पष्ट कर दिया है कि अब 21 जून को इस आसन को करने की जरूरत नहीं होगी।
आयुष राज्यमंत्री श्रीपाद नाईक ने कहा है कि सूर्य नमस्कार करना सभी के लिए संभव नहीं था। यह एक मुश्किल योग है इसलिए योग दिवस पर इसे नहीं किया जाएगा।
ऐसे में यह साफ हो गया है कि अब योग दिवस को सूर्य नमस्कार के बगैर मनाया जाएगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सूर्य नमस्कार की वजह से विपक्षी दलों को मुद्दा मिल जाता। उन्होंने कहा कि योग का किसी धर्म से लेना-देना नहीं है। मुस्लिम लोगों को यह देखना चाहिए कि नमाज पढ़ते समय भी वे आसन की मुद्रा में होते हैं।
21 जून को राजपथ पर होगा 35 मिनट का विशेष कार्यक्रम
दरअसल योग दिवस पर किए जाने वाले आसनों में सूर्य नमस्कार शामिल होने पर कुछ मुस्लिम नेताओं ने आपत्ति जाहिर की थी। विरोध करने वालों में कुछ मुस्लिम राजनीतिक संगठन और धर्मगुरु भी शामिल हैं। उनकी दलील है कि इस्लाम में अल्लाह के अलावा किसी और के सामने झुकने की इजाजत नहीं है।
गौरतलब है कि योग दिवस के मौके पर 35 मिनट के कार्यक्रम में करीब 13 आसन किए जाएंगे। राजपथ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में होने वाले इस विशेष कार्यक्रम में करीब 35 हजार बच्चे, एनसीसी कैडेट, सेना के जवान, सरकारी कर्मचारियों समेत सांसद और मोदी मंत्रिमंडल के सदस्य भी हिस्सा लेंगे।
राजपथ पहुंचने वाले सभी लोगों के लिए आसन करना अनिवार्य किया गया है। इसलिए कार्यक्रम में ऐसे आसन शामिल किए गए हैं, जो सभी के लिए आसान हों। वहीं जिलेवार योग दिवस मनाने के लिए तमाम योग संस्थानों की मदद ली जा रही है।