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‘सरकार बदली लेकिन देश में कुछ नहीं बदला’

Thu, 23 Jul 2015 10:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुंबई
ब्यूरो/अमर उजाला, मुंबई Updated Thu, 23 Jul 2015 10:57 PM IST
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"The government has changed but nothing changed in the country '

देश और प्रदेश में सरकार बदल गई लेकिन जमीनी हकीकत में कोई बदलाव नहीं आया। भाजपानीत केंद्र सरकार लोगों से अच्छे दिन का वादा कर धोखा नहीं दे सकती। इसलिए केंद्र सरकार को काम की गति बढ़ानी होगी। शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ को दिए साक्षात्कार में भाजपा को यह नसीहत दी है।

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उद्धव ठाकरे ने कहा है कि हर दिन सुबह जब हम अखबार पढ़ते हैं, तो वही खबरें पढ़ने को मिलती है, जिनसे कभी हम उकता चुके थे। चाहे वह किसान आत्महत्या का मामला हो या बेरोजगारों का रोजगार के लिए प्रदर्शन या फिर महिलाओं पर अपराध का मुद्दा हो। यह सब वही खबरें हैं जो हम पूर्ववर्ती सरकार के दौरान अखबारों में पढ़ते रहे हैं।
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उद्धव ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि पिछली सरकार ने जो गंदगी फैलाई उसे साफ करने के लिए 50 साल भी काफी नहीं हैं, लेकिन लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पांच साल में ही काफी कुछ करना होगा। उद्धव ने कहा कि सरकार को सुधरना होगा वरना लोग कांग्रेस से तुलना करेंगे।

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कहा, 'बाकी सब आते जाते रहते हैं'

"The government has changed but nothing changed in the country '

उद्घव ने जम्मू-कश्मीर में पीडीपी-भाजपा की गठबंधन सरकार बनने पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए गठबंधन के बाद हुई तब्दीलियों पर सवाल खड़ा किया।

उन्होंने कहा कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को पीडीपी के साथ गठबंधन मंजूर है लेकिन मुंबई आकर वह शत प्रतिशत भाजपा की बात करते हैं।

शिवसेना अध्यक्ष ने भाजपा को याद दिलाया कि शिवसेना ही एनडीए की सबसे पुरानी पार्टी है, बाकी सब आते जाते रहते हैं। उन्होंने कहा कि मेरा किसी से व्यक्तिगत झगड़ा नहीं है लेकिन मुफ्ती मोहम्मद सईद के पहले के विचार और उनकी राजनीतिक शैली को कैसे भूल सकते हैं।

यदि कश्मीर प्रगति करता है तो अच्छी बात है लेकिन सुधार का मतलब यह नहीं कि उन्हें बड़ा पैकेज दे दिया जाए। जरूरत इस बात की है कि वहां के लोगों की भावना भारत के साथ जुड़नी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की पूंछ टेढ़ी है। मोदी में हिम्मत है तो वह पाकिस्तान से कड़ा मुकाबला करें। आखिरकार कश्मीर में पाकिस्तानी झंडे क्यों लहराते हैं। सत्ता में शिवसेना की भागीदारी बढ़ानी होगी और किसानों को कर्ज माफी नहीं बल्कि कर्जमुक्ति  देनी होगी।

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