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जलप्रलय में बह गई उत्तराखंड के लोगों की रोजी-रोटी

Sun, 30 Jun 2013 12:26 AM IST
देहरादून/सुधाकर भट्ट
देहरादून/सुधाकर भट्ट Updated Sun, 30 Jun 2013 12:26 AM IST
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The flood washed away the livelihood of Uttarakhand

आसमान से आई आफत उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के साथ लोगों की रोजी रोटी भी बहाकर ले गई।

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पर्यटन और मुख्य रूप से चारधाम यात्रा प्रदेश के लोगों की रोजी-रोटी का प्रमुख साधन है चलती और इसके चौपट होने से उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

चारधाम यात्रा यदि दो साल तक के लिए अटकती है तो प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी दो साल पीछे खिसक जाएगी।

इस बीच आपदा प्रभावित क्षेत्रों में खराब मौसम के चलते राहत कार्य प्रभावित हो रहा है और शव निकालने में भी परेशानी हो रही है।

सरकारी अमला पुनर्निर्माण में दिलचस्पी नहीं ले रहा है, कर्मचारी तबाही का नजारा देखकर ऊब गए हैं।

आपदा से उत्तराखंड में छोटे और कुटीर उद्योगों पर तो मार पड़ी ही है, प्रदेश का सर्विस सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यही क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
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बदरी-केदार घाटी में हुई तबाही से चारधाम यात्रा धुल गई है। यात्री जब चारधाम यात्रा के लिए निकलता है तो उसके 15 दिन से लेकर एक माह केउत्तराखंड प्रवास में तमाम छोटी बड़ी जरूरतों को यह सेवा क्षेत्र ही पूरी करता है।
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कहीं बुरांस का जूस बिकता है तो कोई फोन से बात कराता है। कोई कार, टैक्सी, गाड़ी का इंतजाम करता है तो कोई ठहरने और खाने का इंतजाम करता है।

हर साल लाखों की संख्या में आने वाले तीर्थयात्रियों से ही चारधाम मार्ग से जुड़े गांव, कस्बों, शहरों की रोजी रोटी चलती है।

देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार जैसे शहरों की ट्रेवल एजेंसियों की कमाई भी इसी पर निर्भर है। चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और टिहरी के कुटीर उद्योगों के लिए माल का खपाने का समय ही यह है।

इसके अलावा 20 हजार से अधिक लघु व कुटीर औद्योगिक इकाइयों को आपदा से चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग आदि जिलों में नुकसान पहुंचा है। अब इनसे जुड़े लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट है।

इस बीच, 14 वें दिन पहाड़ों पर बचाव अभियान आखिरी चरण में पहुंच गया है। शनिवार को बदरीनाथ से 1313 और पिथौरागढ़ से 500 लोग निकाले गए।

बदरीनाथ में अब भी दो हजार यात्रियों के फंसे होने की सूचना है। विपरीत मौसम और विषम परिस्थिति की वजह से केदारनाथ धाम में मलबे से शवों को निकालने का काम मुश्किल हो गया है।

वहीं केदार घाटी में आई आपदा को लेकर शासन और सरकार का रुख गंभीर नहीं है। पीड़ितों की मदद को भेजे गए अधिकारियों-कर्मचारियों को भी बुनियादी जरूरत की चीजें नहीं मुहैया हो रही हैं।


20 हजार से अधिक लघु एवं कुटीर औद्योगिक इकाइयों को आपदा से चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग आदि जिलों में नुकसान पहुंचा है। अब इनसे जुड़े लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट है।
-पंकज गुप्ता, अध्यक्ष इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड

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