फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   The five political parties, earning 845 million

इन पांच राजनीतिक दलों की आय 845 करोड़

Wed, 19 Aug 2015 07:38 AM IST
Updated Wed, 19 Aug 2015 07:38 AM IST
विज्ञापन
The five political parties, earning 845 million

आम आदमी पार्टी को मिले चुनावी चंदे पर भले ही इसी साल तीखी सियासी जंग हुई हो, मगर हकीकत यह है कि राजनीतिक दलों को अपने अधिकतर चंदा देने वाले लोगों की जानकारी ही नहीं होती।

विज्ञापन


चुनाव आयोग के समक्ष राष्ट्रीय पार्टियों की ओर से पेश किए गए ऑडिट रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि इन्हें अपने 80 फीसदी चंदा देने वालों की कोई जानकारी ही नहीं होती।
विज्ञापन


दरअसल महज बीस हजार रुपये से अधिक राशि का दान करने वाले लोगों की ही सभी सूचनाएं उपलब्ध कराने की कानूनी मजबूरी से बचने के लिए सियासी दल अज्ञात स्रोतों अर्थात कूपनों की बिक्री, पर्स मनी, सहायता कोष, अनुदान जैसे रास्तों से धन हासिल होने की जानकारी देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


नेशनल इलेक्शन वाच की रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा को छोड़कर अन्य पांच राष्ट्रीय दलों कांग्रेस, बसपा, माकपा, भाकपा और राकांपा को वर्ष 2013-14 के दौरान करीब 841 करोड़ रुपये की आय हुई थी। इनमें अकेले कांग्रेस की भागीदारी करीब 71 फीसदी थी।

कांग्रेस को हुई 598 करोड़ की आय

The five political parties, earning 845 million

भाजपा ने अब तक चुनाव आयोग को इस आशय का कोई ब्योरा उपलब्ध नहीं कराया है। संस्था ने चुनाव में काले धन के प्रयोग को रोकने के लिए सियासी दलों की चंदे की जांच के लिए सख्त व्यवस्था बनाने की मांग की है।

जानकारी के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2013-14 में कांग्रेस को 598 करोड़, बसपा को करीब 67 करोड़, माकपा को 122 करोड़, राकांपा को 56 करोड़ और सीपीआई को 2.5 करोड़ रुपये की आय हुई।

इन राष्ट्रीय दलों ने दावा किया है कि इनमें से करीब 80 फीसदी आय उन्हें कूपनों की बिक्री जैसी प्रक्रिया से हासिल हुई। इन दलों का कहना है कि उन्हें चंदा देने वालों में महज 20 फीसदी ऐसे लोग हैं, जिन्होंने बीस हजार रुपये से अधिक का चंदा दिया है। बसपा का तो दावा है कि उसे चंदा देने वालों में बीस हजार रुपये से अधिक राशि दान करने वाला कोई था ही नहीं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed