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नक्सलियों को लेकर चीन की बड़ी साजिश का खुलासा

Sat, 23 Aug 2014 12:50 PM IST
Updated Sat, 23 Aug 2014 12:50 PM IST
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the first naxal kanu sanyal

नक्सलवादी आंदोलन के चरम दौर में चीन ने नक्सलियों के लिए नेपाल और भूटान से होकर भारत तक एक गलियारा बनाने की योजना बनाई थी। एक दौर के शीर्ष नक्सली नेता कानु सान्याल के जीवन पर लिखी किताब में इसका खुलासा हुआ है।

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स्टेट्समैन कोलकाता के वरिष्ठ पत्रकार बाप्पादित्य पाल की ओर से सान्याल की जिंदगी पर लिखी किताब ‘द फर्स्ट नक्सल’ में कहा गया है कि चीन ने नेपाल और भूटान से होकर भारत तक गलियारा बनाने की पूरी योजना तैयार कर ली थी लेकिन यह पूरी नहीं हो पाई क्योंकि चीन से लौटने के कुछ दिन बाद ही सान्याल और उनके सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया गया था।
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कानु सान्याल पर लिखी 264 पेज की इस किताब का शुक्रवार को पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के पूर्व चेयरमैन अशोक कुमार गांगुली और मानवाधिकार कार्यकर्ता विनायक सेन ने विमोचन किया।

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'लोगों से ज्यादा हथियारों पर भरोसा करते हैं माओवादी'

the first naxal kanu sanyal

इस किताब के मुताबिक सान्याल का मानना था कि माओवादियों ने आतंकवाद को अपना लिया है इसलिए वे उन्हें कभी भी प्रभावित नहीं कर सके। उनका कहना था कि माओवादी लोगों से ज्यादा हथियार पर विश्वास कर रहे हैं इसलिए जनता से अलग-थलग पड़ते जा रहे हैं।

किताब के मुताबिक सान्याल ने कहा था कि ममता बनर्जी की वजह से ही सिंगुर के किसान कभी अपनी जमीन वापस नहीं पा सकेंगे। नागरिक अधिकार कार्यकर्ता विनायक सेन ने कहा कि नक्सलबाड़ी आंदोलन के दशकों बाद भी भूख उत्तरी बंगाल को परेशान कर रही है। अब भी यहां लोग कुपोषण से मर रहे हैं।

सेन ने इस सिलसिले में उत्तरी बंगाल के बंद और छोड़ दिए गए चाय बागानों का उदाहरण दिया। उन्होंने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ इनका दौरा किया था और वहां काम करने वाले लोगों की स्थिति बेहद खराब पाई थी।

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