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फिर लौटी खूनी बाघिन, लोगों में दहशत

Mon, 13 Jan 2014 12:55 PM IST
Updated Mon, 13 Jan 2014 12:55 PM IST
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The fear of man-eating tiger in up

दो दिन पूर्व मानियावाला के जंगल में एक युवक को शिकार बनाने वाली आदमखोर बाघिन अपने शिकार की तलाश में रविवार को फिर से घटनास्थल पर लौटी।

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बाघिन ने उस स्थान को चाटा, जहां वह अपने शिकार शिव कुमार को छोड़कर गई थी। वहां पंजों के निशान मिले हैं।

हालांकि वन विभाग बाघ के पंजों के निशान बता रहा है। इस बीच वन विभाग ने घटनास्थल पर मचान बनाकर क्षेत्र की निगरानी बढ़ा दी है। उधर, जंगल में बाघिन की तलाश जारी है। मालूम हो कि अब तक बाघिन छह लोगों को अपना शिकार बना चुकी है।
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शुक्रवार को मानियावाला निवासी शिवकुमार को बाघिन ने अपना शिकार बनाया था। उसी समय से वन विभाग की टीम शूटरों के साथ बाघिन की तलाश में लगी हुई है। रविवार को एक वृद्ध ने मानियावाला के जंगल में बाघिन के होने की सूचना दी।
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हाई अलर्ट पर प्रशासन

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वन विभाग की टीम ने दोबारा सर्चिंग की। इस बीच मानियावाला निवासी मृतक शिवकुमार की मां तारा देवी ने आरोप लगाया कि तीन बाद भी प्रशासन ने उन्हें कोई मुआवजा उपलब्ध नहीं कराया। बेटे की मौत होने से उनके परिवार में परेशानी का पहाड़ टूट गया है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने भरोसा दिलाया था कि शासन से छह लाख रुपये दिलाए जाएंगे। डीएफओ बिजनौैर (यूपी) विजय सिंह ने बताया कि गांव मानियावाला में गन्ने के खेतों में आदमखोर बाघिन के छिपे होने की पूरी संभावना है।

बाघिन के पंजों के निशान को आधार बनाकर खेतों के पास मचान बनाया जा रहा है। आदमखोर बाघिन को जीवित पिंजरों में बंद करना प्राथमिकता है जबकि उसको मारना अंतिम विकल्प होगा।

अमानगढ़ के करीब पहुंचकर भटके एक्सपर्ट

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आदमखोर बाघिन का कोई सुराग नहीं लग रहा है। बाघिन ने बिजनौर जनपद छोड़ा या नहीं अभी यह कहा नहीं जा सकता। वन विभाग के अफसरों का तर्क है कि बनेली नदी के आसपास कुछ दूसरे बाघ के पैरों के भी निशान मिले हैं। इससे एक्सपर्ट भी भ्रमित हो रहे हैं।

वन संरक्षक कमलेश कुमार का कहना है कि नदी के इलाके में कन्फ्यूजन की स्थिति हो रही है। यहां कुछ दूसरे बाघों के भी पैरों के निशान मिले हैं। वैसे भी यह इलाका कार्बेट और अमानगढ़ के करीब वाला है, लिहाजा बाघ और लैपर्ड जंगल में यदाकदा आ जाते हैं।

फिर भी खोजबीन की जा रही है। वन संरक्षक ने बताया कि अभी चार-पांच दिन तो अभियान चलेगा ही है। अगर कोई घटना नहीं होती है तो बिजनौर को नो टाइगर जोन घोषित करके ऑपरेशन रोक दिया जाएगा।

बाघिन बगैर मारे काबू करने की भी बनी रणनीति

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आदमखोर बाघिन के उत्तराखंड में पहुंचने की संभावना है। यह बाघिन कोई और शिकार करे, जंगलात उसे काबू करना चाहता है। वन महकमे की पहली प्राथमिकता बाघिन को नुकसान पहुंचाए बगैर ट्रेंकुलाइज कर काबू करना है।

इसके लिए वन विभाग ने बड़ी संख्या में कर्मचारी तैनात कर दिए हैं। कालागढ़ जंगल और आसपास क्षेत्र में वन विभाग की टीम मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं परमजीत सिंह के निर्देशन में डटी हुई है।

यहां पर एक सीसीएफ के अलावा तराई पश्चिम वन प्रभाग डीएफओ राहुल, कार्बेट पार्क के डिप्टी डायरेक्टर साकेत बडोला समेत दो आईएफएस तैनात हैं।

वनाधिकारियों के अनुसार इसके अलावा दो उप प्रभागीय वनाधिकारी, चार वन क्षेत्राधिकारी, 20 वन दरोगा और करीब 70 वन रक्षकों को भी तैनात किया गया है।

सीसीएफ कुमाऊं कहते हैं कि हमारा उद्देश्य आदमखोर बाघिन को नुकसान पहुंचाए बगैर काबू करना है।

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