जलवायु परिवर्तन पर विकसित देश अपनी जिम्मेदारी निभाएं: मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि अब पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की जगह नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने कहा यह बदलाव इतना आसान नहीं है लेकिन हमें सख्त निर्णय लेना पड़ेगा जिससे की नई ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा दिया जा सके।
हम कोयले का इस्तेमाल कम करने की कर रहे हैं, जिसके इस्तेमाल करने का परिणाम गरीबों पर दिखाई दे रहा है। लेकिन हमें विकास की भी जरूरत है इसके लिए पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के जगह नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि क्लि एनर्जी के लिए सबको प्रयास करना पड़ेगा।
हम जीवाश्म ऊर्जा पर अपनी निर्भरता को कम कर रहे हैं। सबको सस्ती ऊर्जा मिले इस ओर ध्यान देने की जरूरत हैं और हम इस दिशा में काम करेंगे। मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसी समस्या से निपटने के लिए सभी देशों को साथ मिलकर काम करना होगा।
कम होगा कॉर्बन उत्सर्जन
नवीकरणीय और स्वच्छा ऊर्जा के इस्तेमाल के लिए एक वैश्विक सहयोग की जरूरत है। हमें विकास की जरूरत है जिसके लिए हमें क्षमता और जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ग्रीन क्लाइमेट फंड की जरूरत है जिसके लिए विकसित देश हर साल करीब 100 बिलियन डॉलर (66 अरब रूपये) का सहयोग करें।
मोदी ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि सबको सस्ती और स्वच्छा ऊर्जा मिले। इस दिशा में काम करने की जरूरत है। उन्होंने कॉर्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए कहा कि हम कॉर्बन उत्सर्जन दर करने की कोशिश कर रहे हैं। साल 2030 तक भारत कॉर्बन उत्सर्जन क दर 30 से 35 फीसदी तक कम करने की कोशिश करेगा।
मोदी ने कई नेताओं से की मुलाकात
मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा, 'मैं राष्ट्रपति बराक ओबामा का बहुत आभारी हूं, लगातार मिलते रहते हैं और खुल कर बात करते हैं।' गौरतलब है कि इस साल नरेंद्र मोदी और बराक ओबामा की कई बार मुलाकात हो चुकी है और दोनों के बीच कई मुद्दों पर लगातार बात होती रहती है।