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देशभर में 2000 से ज्यादा बढ़ीं संघ की शाखाएं

Fri, 24 Jul 2015 07:57 AM IST
Updated Fri, 24 Jul 2015 07:57 AM IST
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The country has more than 2,000 branches of the RSS

केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनने से संघ की बल्ले-बल्ले हो रही है। संघ की शाखाओं में उछाल आया है। देशभर में करीब 2000 से ज्यादा संघ की शाखाएं बढ़ी हैं। मगर संघ इसका श्रेय सीधे मोदी को देने के पक्ष में नहीं है।

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संघ का मानना है कि शाखाओं का बढ़ना मोदी के वजह से नहीं बल्कि संघ की बढ़ रही स्वीकार्यता के वजह से है। स्वयंसेवकों का आचरण एवं संपर्क ही संघ के बढ़ने का औजार है।
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संघ लोकसभा चुनाव 2014 के अप्रत्याशित सियासी परिणामों को भी महज मोदी मैजिक का नतीजा नहीं मान रहा है। संघ का कहना है कि 2014 के आम चुनाव का परिणाम अंग्रेजों के भारत छोड़ने की घटना के बाद का सबसे बड़ा परिर्वतन है। और यह बदलाव महज संघ या किसी अकेले व्यक्ति के वजह से नहीं है।
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संघ के कामकाज पर आत्म मंथन के लिए हर साल होने वाली अखिल भारतीय प्रांत प्रचारकों की बैठक के दूसरे दिन कुछ चुनिंदा पत्रकारों से बातचीत करते हुए मनमोहन वैद्य ने द गार्डियन अखबार के संपादकीय के शीर्षक का उल्लेख करते हुए कहा कि 18 मई 2014 को सही मायने में अंग्रेजो ने भारत छोड़ दिया।

संघ ने कहा मोदी नहीं हैं शाखा बढ़ने की वजह

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संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने मीडिया के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि समाज में परिर्वतन हो रहा है। उसके जरिए ही सरकारें आती हैं। और लोकसभा चुनाव 2014 का परिर्वतन समाज के बदलाव के कारण हैं।

वैद्य ने कहा कि देश में परिर्वतन का माहौल बनाने के लिए कई लोगों ने काम किए हैं। उसमें से संघ भी एक है। वहीं मोदी शासन में शाखाओं के बढ़ते उछाल पर वैद्य ने कहा कि मोदी ने देश के युवाओं पर प्रभाव जरूर डाला है।

मगर शाखा में जाना साधना का कार्य है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि केंद्र में उनकी अपने विचारों के सरकार होने के वजह से संघ के कामकाज में बाधा नहीं आएगी।

जैसा कि पहले की सरकारों में उसे कठिनाईयों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने संघ की शाखा और राजनीति को बिल्कुल अलग बताया। इसके लिए केरल प्रांत  का उदाहरण सामने रखते हुए उन्होनें कहा कि संघ का कार्य देशभर में सबसे बेहत्तर इसी राज्य प्रांत में है। लेकिन वहां भाजपा की स्थिति अच्छी नहीं है।

वैद्य ने कहा कि संघ के सतत बढ़ने की वजह उसके स्वयंसेवक हैं। उसके स्वयंसेवकों का आचरण एवं व्यवहार समाज को आश्वस्त करता है। संघ से समाज को बढ़ रही अपेक्षा को स्वीकार करते हुए प्रचार प्रमुख ने कहा कि संघ बढ़ रहा है, तो अपेक्षा भी बढ़ रही है।

देश भर में 2000 से ज्यादा बढ़ी संघ की शाखाएं

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देशभर के प्रशिक्षण वर्ग में शामिल प्रशिक्षुओं की संख्या का आंकड़ा जारी करते हुए वैद्य ने कहा कि बीते तीन वर्षों में संघ की शाखाओं का 28 प्रतिशत विस्तार हुआ है। देश के 86 प्रतिशत तहसीलों में संघ की शाखा लग रही हैं।

उन्होंने बताया कि देशभर में शाखाओं की संख्या 51335 है। वर्ष 2012 से 15 के बीच 10हजार शाखाएं बढ़ी हैं। जिसमें बीते साल की संख्या दस प्रतिशत है। वैद्य ने कहा कि वैसे तो हर वर्ग में संघ के प्रति रूझान बढ़ा है। मगर युवाओं में यह ज्यादा है। प्राथमिक शिक्षा वर्ग में इस वर्ष 1 लाख 15 हजार लोगों ने प्रशिक्षण लिया।

जबकि पिछले साल यह संख्या 80 हजार थी। इसी तरह प्रथम वष के प्रशिक्षण में भी कार्यकर्ताओं की रूचि बढ़ी है। नियमों को कठोर बनाने के बावजूद भी पिछले वर्ष के अपेक्षा इस साल 4000 कार्यकर्ताओं ने ज्यादा प्रशिक्षण प्राप्त किया।

यहीं नहीं वेबसाईट और सोशल मीड़िया के जरिए भी लोग अधिक संख्या में संघ ने जुड़ने का विचार प्रकट कर रहे हैं। बीते साल से ऑनलाईन के जरिए प्रत्येक माह 5 लोग संघ से जुड़ने की इच्छा जता रहे हैं।

संघ के विस्तार पर मंथन

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संघ के वर्तमान हालातों पर चिंतन के अलावा उसके विस्तार की भी योजनाएं बनी हैं। संघ ने तय किया है कि वह अपने कामकाज को अगले तीन साल में ग्राम पंचायत से उपर के स्तर न्याय पंचायत तक ले जाएगा। हर न्याय पंचायत में संघ की शाखा लगेगी। वंचित तबके को संघ से जोड़ने की रणनीति पर शुक्रवार को मंथन होगा।

संघ की योजना अगले वर्ष अपने प्रमुख रहे स्व. बाला साहब देवरस की जन्मसदी वर्ष के जरिए निचले तबके में समरसता साधने की है। वैद्य ने कहा कि देवरस सदा ही समरसता के पक्षधर थे। उनके आदर्शों को संघ अभियान के तहत निचले स्तर तक लेकर जाएगा।

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