फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   the congress will get its end in ten years

'पांच-दस साल में कांग्रेस ख़त्म हो जाएगी'

Fri, 14 Mar 2014 06:53 PM IST
रामचंद्र गुहा/मशहूर इतिहासकार
रामचंद्र गुहा/मशहूर इतिहासकार Updated Fri, 14 Mar 2014 06:53 PM IST
विज्ञापन
the congress will get its end in ten years

भारत के मौजूदा राजनीतिक हालात में लगता है कि कांग्रेस पार्टी का भविष्य अच्छा नहीं है। पांच-दस सालों में या तो कांग्रेस पार्टी ख़त्म हो जाएगी या पार्टी बिना गांधी परिवार के ही चलेगी। पार्टी के अंदर नया नेतृत्व उभरेगा।

विज्ञापन


एक समय ऐसा था जब गांधी परिवार की ज़रूरत कांग्रेस को थी लेकिन अब गांधी परिवार को कांग्रेस की ज़रूरत है। गांधी परिवार अपने आख़िरी दौर से गुज़र रहा है। मुझे लगता है कि ये उनके आख़िरी पांच-छह साल हैं। इस परिवार ने भारतीय राजनीति में अपनी भूमिका अदा कर ली है।
विज्ञापन


एक आम नागरिक की नज़र से बात करें तो आम नागरिक को हर सरकार से यह उम्मीद होती है कि सरकार देश का विकास करेगी और उनके जीवन स्तर में सुधार लाएगी।

लेकिन एक इतिहासकार के तौर पर मैं कहूंगा कि यह 16वां लोकसभा चुनाव है और इससे पहले के 15 लोकसभा चुनाव भी बेहद ख़ास थे इसलिए ऐसा नहीं है कि मैं इसे कुछ ख़ास या ज़्यादा महत्वपूर्ण मानूं।

विज्ञापन
विज्ञापन

'मोदी की थोड़ी बहुत लहर'

the congress will get its end in ten years

मोदी की थोड़ी बहुत तो लहर है। पार्टी और कार्यकर्ताओं में जोश आया है इसका असर पड़ेगा। पिछली बार भी हमने यह नहीं सोचा था कि कांग्रेस 206 सीटों के साथ आएगी। उससे पहले यह किसको पता था कि पोकरण के बाद अटल बिहारी जी की सरकार आएगी।

हर चुनाव अपने आप में महत्वपूर्ण है। लोग खुलकर आज़ादी के साथ अपना वोट दें यह महत्वपूर्ण है। ऐसा लगता है कि क्लिक मोदी ने भाजपा को लाभ पहुंचाया है। नेतृत्व की पार्टी को आगे लाने में भूमिका होती है।

मोदी ने पार्टी के अंदर जोश भरा है लेकिन यहां अमेरिका की तर्ज पर अध्यक्षीय प्रणाली पर चुनाव नहीं होते हैं। इसलिए हर सीट से उम्मीदवारी किसकी है यह मायने रखता है। लेकिन नरेंद्र मोदी अपने दम पर चुनाव नहीं जीत सकते हैं।

इतिहास में एक ही नेता थी जिसने अपने दम पर एक बार चुनाव जिताया और एक बार चुनाव हराया भी। वो थी इंदिरा गांधी। उन्होंने साल 1971 में चुनाव जिताया और अपनी ही वज़हों से 1977 में हराया भी। मोदी उस स्तर पर अभी तक नहीं पहुंचे हैं।

..आम आदमी पार्टी

the congress will get its end in ten years

नई पार्टी आम आदमी पार्टी को मैं दिलचस्पी के साथ देख रहा हूं। इसमें नौजवानों की अच्छी भागीदारी है। उनमें नई दिशा है आदर्शवाद भी है। परंपरागत पुरानी पार्टियों कांग्रेस और भाजपा से यह पूंजीपतियों से सांठगांठ के मामले में अलग है।

इनको चंदा देने वाले आम लोग हैं लेकिन ये थोड़ी जल्दबाज़ी में हैं। अगर वो यह सोचें कि 10 या 15 साल में देश के इतिहास को बदलेंगे तब यह बेहतर रहेगा और मेरी निजी राय है कि इस बार लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी 50-60 से ज़्यादा सीटों पर चुनाव नहीं लड़े तो बेहतर रहेगा।

'खाली जगह'

the congress will get its end in ten years

वामपंथी दल बंगाल और केरल में सत्ता से बाहर हो गए हैं और वे अब सिर्फ त्रिपुरा में बचे हैं इसलिए एक बहुत बड़ा स्पेस खाली पड़ा है और उस स्पेस को आम आदमी पार्टी भर सकती है। वामपंथी दल उस शक्ति के साथ वापस नहीं आ सकते हैं।

कांग्रेस में बहुत संकट है। इसलिए आम आदमी पार्टी इन दोनों की जगह ले सकती है बशर्तें वो दूरगामी सोच के साथ काम करे। आम आदमी पार्टी की राजनीति की शुरुआत जिस अन्ना आंदोलन से हुई उसमें दक्षिणपंथी रूझान दिख रहा था। लेकिन उनकी राजनीतिक विचारधारा अभी साफ नहीं हो पाई है।

इससे कई पूंजीपति भी जुड़ रहे हैं इसलिए वो कभी नहीं चाहेंगे कि पार्टी पूरी तरह से वामपंथी विचारधारा के गिरफ़्त में चली जाए। वो थोड़ा बाज़ार की ताक़तों को भी साथ लेकर चलना चाहेंगे। इसलिए उनकी विचारधारा पर बात करना अभी जल्दबाज़ी होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed