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'भारत में लागू नहीं हो सकती वैवाहिक रेप की धारणा'

Thu, 30 Apr 2015 04:43 PM IST
एजेंसी/दिल्ली
एजेंसी/दिल्ली Updated Thu, 30 Apr 2015 04:43 PM IST
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The concept of marital rape can not be applied in India

राज्यसभा में द्रमुक सांसद कनिमोझी के सवाल पर केंद्र सरकार ने बुधवार को कहा कि वैवाहिक बलात्कार की धारणा भारत पर लागू नहीं की जा सकती। यहां विवाह को ‘पवित्र’ संस्कार माना जाता है। लिहाजा इसे कानूनन अपराध बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

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केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हरिभाई पार्थीभाई चौधरी ने कहा कि ‘समझा जाता है कि वैवाहिक बलात्कार की अवधारणा (जैसा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माना जाता है) अनेक कारणों से भारतीय परिप्रेक्ष्य में उपयुक्त तरीके से लागू नहीं की जा सकती। भारत में इसके पीछे शिक्षा, निरक्षरता का स्तर, गरीबी, अनेक रीति-रिवाज और मूल्य, धार्मिक आस्थाएं, विवाह को संस्कार मानने की समाज की सोच आदि जैसे कई कारण हैं।'
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उन्होंने राज्यसभा में द्रमुक सांसद कनिमोझी के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह बात कही। कनिमोझी ने गृह मंत्रालय से पूछा था कि क्या सरकार बलात्कार की परिभाषा से वैवाहिक बलात्कार के अपवाद को हटाने के लिहाज से आईपीसी में संशोधन के लिए कोई विधेयक लाएगी। क्या यह सच है कि संयुक्त राष्ट्र की महिलाओं के खिलाफ भेदभाव उन्मूलन समिति ने भारत से सिफारिश की है कि पत्नी से जबरन संबंध को अपराध घोषित किया जाए।

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दिया संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का हवाला

The concept of marital rape can not be applied in India

कनिमोझी के सवाल के जवाब में चौधरी ने कहा, ‘भारत के विधि आयोग ने बलात्कार से जुड़े कानूनों की समीक्षा पर 172वीं रिपोर्ट तैयार करते समय भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के अपवाद में संशोधन करके वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने की सिफारिश नहीं की है। लिहाजा, अभी आईपीसी में इस बाबत संशोधन करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।’

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का हवाला
कनिमोझी ने इसके लिए यूएन पॉप्यूलेशन फंड की रिपोर्ट का हवाला दिया। इसके मुताबिक भारत में 75 फीसदी विवाहित महिलाएं पतियों द्वारा रेप की शिकार होती हैं।

व्यावहारिक दिक्कतें होंगी : सरकार
सरकार का कहना है कि वैवाहिक बलात्कार को अपराध के तौर पर स्वीकार करने से ‘व्यावहारिक दिक्कतें’ खड़ी हो सकती हैं। वहीं आईपीसी से इसे अलग रखने के फैसले का कई महिला संगठन विरोध कर रहे हैं।

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