मुख्य न्यायाधीश ने जूनियर को दी काम की सीख
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सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश ने मुख्य न्यायाधीश से अवकाश के दिन न्यायाधीशों का सम्मेलन बुलाने पर विरोध जताया है। गुड फ्राइडे के दिन सम्मेलन शुरू होने पर न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने अपने पत्र में कहा है कि यह दिन धार्मिक कार्यक्रमों और परिवार से मिलने जुलने का होता है।
इस पर मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रश्न न्यायाधीश को खुद से पूछना चाहिए कि संस्थागत हित ज्यादा जरूरी होता है कि व्यक्तिगत हित।
शुक्रवार को शुरू हुआ तीन दिवसीय यह सम्मेलन रविवार तक चलेगा। सम्मेलन में 24 उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश भाग ले रहे हैं। न्यायमूर्ति जोसेफ ने अपने पत्र में कहा कि उन्हें गहरी पीड़ा के साथ यह कहना पड़ रहा है कि पवित्र और अवकाश के दिनों में हम आध्यात्मिक कार्य और परिवार के लोगों से मिलने जुलने में व्यस्त होते हैं, ऐसे समय कांफ्रेंस नहीं होने चाहिए।
सीजेआई बोले, संस्थागत हित, निजी हित से जरूरी
उन्होंने कहा कि इसे सांप्रदायिक रूप में न लें, लेकिन ऐसे सम्मेलन दिवाली, दशहरा, होली या ईद के दिनों में नहीं होते। जवाब में न्यायमूर्ति दत्तू ने जस्टिस जोसेफ को लिखे पत्र में कहा है कि धार्मिक कार्यक्रम और परिवार से मिलना जुलना महत्वपूर्ण है, ऐसे कार्यक्रम के समय परिवार को दिल्ली बुलाया जा सकता है।
इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश केटी थामस ने जस्टिस दत्तू का समर्थन करते हुए कहा कि अमेरिका में 98 फीसदी लोग ईसाई हैं, वहां लोग गुड फ्राइडे को चर्च भी जाते हैं और कार्य के लिए भी।
अभी हाल में ही सुप्रीम कोर्ट के वकील लिली थॉमस ने भी ईसाइयों के पवित्र दिन ऐसे आयोजन पर मुद्दा मुख्य न्यायाधीश के समक्ष उठाया था।