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गृह सचिव राज्यपाल को इस्तीफे के लिए कैसे कह सकते हैं : सुप्रीम कोर्ट

Thu, 28 Jan 2016 05:43 AM IST
Updated Thu, 28 Jan 2016 05:43 AM IST
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The case of resignation of Uttarakhand and Puducherry governor

केंद्रीय गृह सचिव की ओर से फोन कर उत्तराखंड के पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी को इस्तीफा देने के लिए कहने पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद आपत्ति जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि आखिरकार गृह सचिव एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को इस्तीफा देने के लिए कैसे कह सकते हैं?

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सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। इतना ही नहीं शीर्ष अदालत ने यह भी पाया कि पुडुचेरी के पूर्व राज्यपाल वीरेंद्र कटारिया को तो केंद्रीय गृह सचिव ने नहीं बल्कि उनके निजी सचिव ने फोन कर इस्तीफा देने के लिए कहा था।
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इन दोनों को 2014 में राज्यपाल के पद से हटाया गया था। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने इन दोनों मसले पर केंद्र से जवाब देने को कहा है।
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पीठ के समक्ष अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि किसी ने कुरैशी को इस्तीफा देने के लिए नहीं कहा। राष्ट्रपति ने कुरैशी द्वारा बलात्कार से संबंधित बयान पर सफाई मांगी थी, जिसके बाद गृह सचिव ने राज्यपाल को फोन किया था लेकिन उन्होंने राज्यपाल को इस्तीफा देने के लिए नहीं कहा था।

रोहतगी ने यह भी कहा कि वैसे भी गृह सचिव सरकार का नोडल अधिकारी होता है, वह फोन कर सकता है। इस पर पीठ ने कहा कि जब तक कोई दबाव नहीं डाला गया हो गृह सचिव इस तरह की बात कैसे कर सकते हैं।

उत्तराखंड और पुडुचेरी के राज्यपाल से इस्तीफा मांगने का मामला

The case of resignation of Uttarakhand and Puducherry governor

अटॉर्नी जनरल ने कहा कि गृह सचिव राज्यपालों से निरंतर संपर्क में रहते हैं और उनके बीच में दोस्ताना व्यवहार होता है। उनके बीच फोन पर बातचीत होती रहती है।

इस पर पीठ ने कहा कि यह वह दोस्ती नहीं है जिससे कि गृह सचिव फोन कर राज्यपाल को इस्तीफा देने के लिए कहे। पीठ ने कहा कि गृह सचिव और राज्यपाल के बीच लिखित संवाद होना चाहिए लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं है।

गृह सचिव को राष्ट्रपति की ओर से कुरैशी के मामले में पूछा गया तो ऐसी क्या परिस्थिति थी जिससे गृह सचिव ने फोन कर यह सब जानकारी मांगी। पीठ ने पूछा कि क्या गृह सचिव ने इस संबंध में राष्ट्रपति को कोई रिपोर्ट सौंपी थी।

इस पर सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने बताया कि राज्यपाल ने सीधे राष्ट्रपति को अपना जवाब दिया था, जिसके बाद पीठ ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए जवाब दाखिल करने के लिए कहा।

कटारिया के मामले  में संविधान पीठ ने पाया कि उन्हें तो इस्तीफा देने केलिए तत्कालीन केंद्रीय गृह सचिव अनिल गोस्वामी ने नहीं बल्कि उनकेनिजी सचिव ने फोन किया था। अदालत ने सुनवाई की अगली तारीख 28 मार्च मुकर्रर की है।

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