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पढ़िए, घोटाले के आरोपी मतंग की पूरी कहानी

Fri, 06 Feb 2015 08:58 AM IST
Updated Fri, 06 Feb 2015 08:58 AM IST
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The bureaucrats are deeper relationship with Matang

शारदा चिटफंड घोटाले के आरोपी मतंग सिंह की ग्लैमर और ताकत की नुमाइश भरी दुनिया में सिर्फ पूर्व गृह सचिव अनिल गोस्वामी ही नहीं अफसरशाही के कई नामचीन शख्स फंसे हुए हैं। मतंग से नजदीकी के चलते गोस्वामी के पद की बलि ने सरकार के कई पूर्व और वर्तमान आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को सावधान कर दिया है।

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इनमें सीबीआई और अर्द्धसैनिक बल के भी अधिकारी शामिल हैं। गोस्वामी की घटना के बाद गृह मंत्रालय के कुछ अधिकारियों पर भी नजर रखी जा रही है। मतंग सिंह पिछले कुछ सालों से अपने दिल्ली के गोल मार्केट स्थित आलीशान ठिकाने और गुवाहाटी के ब्रह्मपुत्र अशोक होटल से अपने ग्लैमर और पावर गेम का संचालन कर रहे थे।
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इसी गोल मार्केट के डाक्टर लेन के ठिकाने पर पूर्व गृह सचिव अक्सर देखे जाते थे। मतंग के पावर गेम को बारीकी से जांचने वाले अधिकारी ने बताया कि मतंग ने असम की स्थानीय राजनीति से राज्यसभा सीट पा कर दिल्ली में अपनी पैठ बनाई। यहीं से उन्होंने दिल्ली के ताकतवर अफसरशाही को साधना शुरू किया।
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तेजतर्रार मतंग को 1993 में नरसिंह राव सरकार में पीएमओ के राज्यमंत्री की जगह मिली। सूत्रों के मुताबिक विवादास्पद तांत्रिक चंद्रास्वामी ने मतंग में भविष्य की संभावनाएं देखते हुए उन्हें नरसिंह सरकार में जगह दिलवाई थी।

नरसिंह राव सरकार में राज्य मंत्री ‌थे मतंग

The bureaucrats are deeper relationship with Matang

सूत्रों के मुताबिक मतंग असम सहित उत्तर पूर्व राज्यों के लॉटरी व्यापार के बेताज बादशाह थे। साथ ही टिम्बर व्यापार और उत्तरी असम के कोयला खदानों को भी लंबे समय तक कब्जे में रखा। केंद्र में राज्य मंत्री का पद पाने के बाद उनके सारे धंधे में गजब का निखार आया।

इसके जरिये उन्होंने नब्बे के दशक में अफसरशाही, दलालों और राजनीति के सभी समीकरणों का इस्तेमाल किया। इसी दौरान उन्होंने ग्लैमरस पत्रकार मनोरंजना सिंह से दूसरी शादी की। मतंग के नजदीकियों का मानना है कि असम और दिल्ली में न्यूज चैनल के धंधे में आने के बाद मतंग का शक्ति संतुलन बिगड़ने लगा।

पैसे को लेकर मनोरंजना से तनातनी हो गई। चैनल बिजनेस के धंधे के सिलसिले में शारदा के मालिक सुदीप्तो सेन ने मतंग को करीब 28 करोड़ रुपये दिए थे। लेकिन मामले की जांच कर रही सीबीआई का मानना है कि यह रकम चैनल के लिए नहीं बल्कि किसी बड़े काम के एवज में घूस के तौर पर दी गई थी।

गौरतलब है कि इसी चैनल के संबंध में केनरा बैंक से लिए गए करोड़ों के कर्ज के मामले में सीबीआई जांच चल रही है। सूत्रों के मुताबिक पूर्व सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा इस मामले में चार्जशीट दायर करने में टालमटोल करते रहे। जानकारों के मुताबिक सिन्हा और मतंग अक्सर शाम साथ बिताया करते थे।

मंत्रालयों में अवांछितों की आवाजाही पर केन्द्र सख्त

The bureaucrats are deeper relationship with Matang

भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश देकर सत्ता तक पहुंच मोदी सरकार अब अपनी साख को लेकर सजग है। अफसरशाही में भ्रष्टाचार के कुछ मामले सामने आने के बीच सरकार ने सभी मंत्रालयों को अवांछित लोगों पर नजर रखने के लिए कहा है। इसके लिए बाकायदा रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश हैं और इसकी जानकारी सीबीआई को देने के लिए कहा गया है।

दरअसल, मंत्रालय अपने स्तर पर इस तरह की कसरत करते रहे हैं। लेकिन  सभी मंत्रालय इसे लेकर सहयोग नहीं कर रहे हैं। मगर अब सभी मंत्रालयों के मुख्य सतर्कता अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे आवंछनीय लोगों पर नजर रखने की कसरत को गंभीरता से देखें और इसकी नियमित तौर पर रिपोर्ट सीबीआई को भी दें।

शारदा चिट फंड घोटाले में पूर्व केंद्रीय मंत्री मतंग सिंह की गिरफ्तारी रोकने में हस्तक्षेप के आरोपों में पूर्व गृह सचिव अनिल गोस्वामी को हटाने और सीबीआई के पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा के 2जी और कोयला घोटाले से के आरोपियों  से संबंध रखने जैसे कई मामले सामने आए हैं। सरकार इन मामलों को लेकर काफी सतर्क है।

इसलिए मंत्रालयों के मुख्य सतर्कता अधिकारियों को चिट्ठी लिखी गई है कि वे मंत्रालयों के दफ्तरों में आवंछित लोगों पर नजर रखें। गैर जरूरी तरह से घूम रहे लोगों पर निगाह रखी जाए और इन संदिग्ध लोगों को लेकर गुपचुप रिपोर्ट बनाई जाए। जरूरत पड़ने पर इसकी रिपोर्ट सीबीआई को भी भेजी जाए।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस तरह की कसरत पहले भी मंत्रालय के स्तर पर चलती रही है। लेकिन नई सरकार आने के बाद मौजूदा घटनाक्रम के बीच इस तरह की प्रणाली पर बहुत ज्यादा जोर दिया जा रहा है।

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