जेटली के बचाव में स्मृति ईरानी ने कर दी बड़ी गलती
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अपने भाषणों को लेकर हमेशा चर्चा में रहने वाली केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी वित्त मंत्री अरुण जेटली पर लगे आरोपों पर सफाई देते समय फिर ऐसी गलती कर बैठी जिसने तथ्यों को लेकर उनकी जानकारी पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उनकी यह गलती सोशल मीडिया पर भी तुरंत पकड़ी गई और लोगों ने उनकी खिंचाई शुरू कर दी। असल में आप नेताओं द्वारा सुबह प्रेस कान्फ्रेंस कर केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ डीडीसीए में भ्रष्टाचार के बड़े आरोप लगाए गए थे।
जिसके बाद से ही पूरी पार्टी जेटली के समर्थन में उतर आई और उनका बचाव शुरू कर दिया। इसी कड़ी में केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति इरानी ने भी पार्टी की ओर से मीडिया के सामने आकर जेटली पर लगे आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया था।
राजबाला की मौत को जोड़ा अन्ना आंदोलन से
अपनी बातचीत शुरू करते ही स्मृति इरानी तथ्यों की एक बड़ी गलती कर बैठी। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता केजरीवाल ने अन्ना के आंदोलन से भ्रष्टाचार के खिलाफ जो लड़ाई का जो वायदा किया था उसे आज तिलांजलि दे दी।
ईरानी ने आगे बोली अन्ना आंदोलन के दौरान भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के लिए राजबाला ने जो बलिदान किया था केजरीवाल ने उसे भी दरकिनार कर दिया। स्मृति का यह कहना ही एक बड़ी गलती को जन्म दे गया।
असल में स्मृति ईरानी ने अपनी बातचीत में जिन राजबाला का संदर्भ दिया उनकी मौत अन्ना आंदोलन के दौरान नहीं योग गुरु रामदेव द्वारा यूपीए सरकार के खिलाफ किए गए आंदोलन के दौरान हुई थी।
सोशल मीडिया पर शुरू हुई खिंचाई
लाठीचार्ज के दौरान मची भगदड़ में गंभीर रूप से घायल हुई राजबाला ने बाद में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। इसको लेकर रामदेव ने तत्कालीन यूपीए सरकार पर उनकी हत्या करने का आरोप भी लगाया था। उसी राजबाला को आज स्मृति ईरानी ने अन्ना आंदोलन से जोड़कर केजरीवाल पर प्रहार किया था।
उनकी यह गलती सोशल मीडिया पर तुंरत सुर्खियां बन गईं। लोगों ने उनकी तथ्यात्मक जानकारी और याद्दाश्त पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। वहीं कुछ लोगों ने उनकी इस गलती को उनकी शैक्षिक योग्यता से भी जोड़ दिया।
बता दें कि मोदी सरकार में स्मृति इरानी की गिनती उन विवादित मंत्रियों में होती है जिनको लेकर लगातार विवाद सामने आते रहे हैं। चाहे वो उनकी कथित फर्जी डिग्रियों को लेकर चल रही बहस हो या देश के शीर्ष शैक्षिक संस्थाओं के प्रशासकों से उनके टकराव का मामला हो। स्मृति से विवाद के चलते ही आधा दर्जन शीर्ष संस्थाओं के अध्यक्ष इस्तीफा दे चुके हैं।
.@smritiirani जी, राजबाला जी 4 जून की रात को पुलिस लाठीचार्ज में घायल हुईं और बाद में उनकी दुख़द मृत्यु हुई। @yogrishiramdev वाली 4 जून।
— Ankit Lal (@ankitlal) December 17, 2015