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निर्दलियों के चुनाव लड़ने पर लग सकती है रोक

Fri, 13 Mar 2015 08:46 AM IST
Updated Fri, 13 Mar 2015 08:46 AM IST
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The bans on independents contesting

विधि आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में सुधार के लिए उम्मीदवारों को दो सीटों से चुनाव लड़ने से रोकने, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति कॉलेजियम के जरिये करने और निर्दलीय उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोकने जैसे कई अहम सुझाव दिए हैं।

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चुनाव सुधार पर अपनी दूसरी रिपोर्ट में आयोग ने अनिवार्य वोटिंग के विचार को खारिज करते हुए सदन का कार्यकाल खत्म होने से छह माह पहले सरकारी विज्ञापनों के नियमन और उन पर प्रतिबंध लगाने का भी सुझाव दिया है।
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चुनावी खर्च के मसले पर आयोग ने कहा है कि उम्मीदवारों की ओर से किए गए खर्च का दायरा बढ़ाकर चुनाव तारीख की घोषणा से परिणाम घोषित होने की तारीख किया जाना चाहिए। इतना ही नही आयोग ने चुनावी चंदे में पारदर्शिता के लिए कंपनी कानून में बदलाव का भी सुझाव दिया है।
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कानून में कंपनी के निदेशक मंडल की वार्षिक आम बैठक में राजनीतिक दल को चंदा देने के बारे में प्रस्ताव पारित करने की बात जोड़ने को कहा गया है। आयोग ने कहा कि चुनावी खर्चे का हिसाब-किताब नहीं रखने पर उम्मीदवार को अयोग्य घोषित किया जाए।

दो सीटों से चुनाव लड़ने पर रोक की मांग

The bans on independents contesting

पेड न्यूज के मसले पर चुनाव आयोग की राय से सहमति जताते हुए आयोग ने कहा है कि किसी खबर के लिए पैसा देने या पैसा लेने को चुनावी अपराध स्वीकार करते हुए इसे जन प्रतिनिधित्व कानून में शामिल किया जाना चाहिए और इसके लिए कड़े दंड की व्यवस्था भी होनी चाहिए।

निर्दलीय उम्मीदवारों पर रोक लगाने के बारे में आयोग ने कहा कि वर्तमान ने निर्दलीय उम्मीदवारों की बाढ़ सी आ गई है और इसमें से अधिकतर फर्जी और समान नाम वाले उम्मीदवार होते हैं, जिनका मकसद मतदाताओं को भ्रमित करना होता है।

इस सुझावों के बारे में आयोग के अध्यक्ष पूर्व जस्टिस एपी शाह ने कहा कि जो निर्दलीय चुनाव लड़ना चाहते हैं वे चुनाव आयोग के पास अपनी एक पार्टी पंजीकृत करवा सकते हैं।

आयोग ने कहा कि दो सीटों से उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने के कारण मतदाताओं का समय बर्बाद होता है और उन्हें गैर जरूरी परेशानी होती है।

राष्ट्रपति के पास हो अयोग्य ठहराने की शक्ति

The bans on independents contesting

सांसदों और विधायकों को अयोग्य ठहराने के मसले पर आयोग ने कहा है कि ऐसी शक्ति संसद या विधानसभा के अध्यक्ष की जगह राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास होना चाहिए जो चुनाव आयोग के सुझाव पर फैसला करें।

शाह ने कहा कि इस मामले में वास्तविक शक्ति आयोग के पास होगी और इससे सभा अध्यक्ष के पद की गरिमा बढ़ेगी। आयोग ने नोटा का दायरा बढ़ाने से इनकार करते हुए कहा कि वह नोटा को सबसे अधिक वोट मिलने की स्थिति में चुनाव को अवैध करार देने का पक्षधर नहीं है।

उसने प्रतिनिधियों को वापस बुलाने जैसे प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। अपनी पहली रिपोर्ट में आयोग ने उन उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराने का सुझाव दिया था, जिनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका हो।

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