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कुबेर का खजाना है आतंक के इन आकाओं के पास

Sat, 04 Oct 2014 09:00 PM IST
Updated Sat, 04 Oct 2014 09:00 PM IST
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The 7 Richest Terrorist Groups in the World Today

उन्हें मशीनगन, हैंड ग्रेनेड, बमों के धमाकों और बिखरी हुई लाशों का खौफ नहीं है। कत्ल-ओ-गारत को वे अपने मिशन का हिस्सा मानते हैं। उन्होंने बारूद से ही कत्ल नहीं किए हैं, नशे की खेती कर कई मुल्कों को तबाह करने की साजिश भी की।

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दुनिया भर में आतंकियों को अलग-अलग नामों से पहचाना जाता है। दहशतगर्दी का ढांचा भी एक जैसा नहीं है। ये इराक और सीरिया के रेगिस्तानों में इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) के रूप में संगठित हैं।
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अरब के कई मुल्कों में अलकायदा आतंकियों का सरपरस्त है। पाकिस्तान में ये लश्कर-ए-तैयबा के रूप में सक्रिय हैं। हालांकि आतंकवाद की परिभाषा अलग-अलग मुल्कों में अलग-अलग है। एक ही संगठन एक मुल्क में आतंकी है और दूसरे मुल्क में आंदोलन। लेकिन इसमें दो राय नहीं कि समकालीन दुनिया में आतंकवाद स्थायी तत्व हो चुका है।

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दहशतगर्द अब दौलतमंद भी हैं

The 7 Richest Terrorist Groups in the World Today

हालांक‌ि आतंकी संगठनों की विचारधारा और मांगों पर बहस पुरानी बात हो चुकी है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे संगठनों की अर्थव्यवस्‍था ने अपनी ओर ध्यान खींचा है।

इराक और सीरिया में आईएसआईएस के उभार के बाद ये ‌सवाल और ज्यादा पूछा जाने लगा है कि आतंकियों के पास दौलत आती कहां से है? क्रूरता और कत्ल-ओ-गारत आतंकी संगठनों की पहचान थी ही लेकिन अब उन्हें एक विशेषण से नवाजा जाने लगा है-दौलतमंद। 

दरअसल, अपहरण, फिरौती, मानव तस्करी, हथियारों और नशे के कारोबार के जरिए आतंकी सगठनों ने अथाह दौलत कमाई है। आईएसआईएस एक नजीर भर है, दुनिया में कई ऐसे संगठन है, जिन्होंने आतंक को व्यापार बना दिया है।

आमदनी के हिसाब से आईएसआईएस सबसे धनी आतंकवादी संगठन है। दि रिचेस्ट डॉट कॉम ने आतंकी संगठनों की सूची में दूसरे और तीसरे स्‍थान पर क्रमशः अफगान ताल‌िबान और आयरिश रिपब्लिकर आर्मी को रखा है।

पढ़िए, आतंक और दौलत का कॉकटेल बन चुके ऐसे ही संगठनों की कहानी-

आईएसआईएस

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फॉरेन पॉलिसी डॉट कॉम के मुताबिक, इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) विश्व का सबसे धनी आतंकी संगठन है। सीरिया और इराक के बड़े भूभाग पर कब्जे के बाद जून महीने में आईएसआईएस ने उस इलाके को इस्लामिक राज्य बना दिया।

संगठन के सरगना अबू बकर अल बगदादी को 'खलीफा' और दुनिया में मुस्लिमों का नेता घोषित किया गया। बिजनेस इन्साइडर डॉट कॉम के मुताबिक, सुन्नी आतंकी संगठन आईएसआईएस फिरौती और तेल के अवैध कारोबार के जरिए 10 लाख डॉलर से तीस लाख डॉलर (तकरीबन 61 करोड़ से एक अरब 83 करोड़ रुपए) रोजाना कमाता है।

कई विशेषज्ञों का मानना है कि सीरिया के 60 फीसदी तेल-क्षेत्र पर आईएसआईएस का कब्जा है। आईएसआईएस गैस, कृषि उत्पादों को बेचकर भी पैसे कमाता है।

संगठन अपने कब्जे के इलाकों में बिजली और पानी पर कर लगा कर भी कमाई कर रहा है। आईएसआईएस की कमाई का एक जरिया फिरौती भी है। इसी वेबसाइट के मुताबिक, आईआईएस 12 मिलयन डॉलर (लगभग 7 अरब 33 करोड़ रुपए) महीने कमाता है।

कब सामने आया संगठन-1999 में इराक में गठित संगठन जमात अल तवाहिद वल जिहाद ही बाद में आईआईएसआई के रूप में संगठित किया गया। 1999 से 2013 के अंतराल में संगठन ने कई बार अपना नाम बदला।

2013 में ये इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड लिवांट के रूप में सामने आया। 29 जून, 2014 को खिलाफत की स्‍थापना करने के बाद ये इस्लामिक स्टेट के रूप में पहचाना जाने लगा। अबू बकर अल बगदादी आईएस का सबसे बड़ा नेता है।

अल कायदा

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ओसामा बिन लादेन की मौत हो चुकी है लेकिन अल कायदा का खौफ अब भी कायम है। संगठन के नए नेता अयमान अल जवाहिरी ने भारत के खिलाफ जिहाद छेड़ने का आह्वान कर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को भी चौकन्ना कर दिया।

वैसे तो ये संगठन 80 के दशक से अस्तित्व में था लेकिन 11 सितंबर, 2001 में अमेरिका में ट्विन टॉवर पर किए गए हमलों के बाद ये संगठन अधिक जाना गया।

अमेरिकन खुफिया एजेंसी सीआईए मुताबिक, कुछ सालों पहले तक अलकायदा की कमाई लगभग 30 मिलियन डॉलर सालाना थी। लेकिन एक अनुमान के मुताबिक अब ये बढ़कर लगभग 100 मिलियन डॉलर हो गई है।

अलकायदा की आमदनी का स्रोत भी चंदा ही बताया जाता है। दी रिचेस्‍ट डॉट कॉम ने अमीर आतंकी संगठनों की सूची में चौथे पायदान पर रखा है।

कब सामने आया संगठन- ओसामा बिन लादेन और अब्दुल अज्‍जाम समेत कई नेताओं ने अलकायदा की स्‍थापना 1988 और 1989 के बीच हुई थी। संगठन को अफगानिस्तान-सोवियत युद्घ सोवियत यूनियन के खिलाफ लड़ने के लिए बनाया गया था।

हालांकि सोवियत यूनियन के पतन के बाद 90 के दशक में अंतराष्ट्रीय स्तर के ऐसे संगठन के रूप में उभरा जिसका मक‌सद दुनिया भर में जिहाद फैलाना था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, नाटो, यूरोप‌ीय यूनियन और अमेरिका ने अल कायदा पर प्रतिबंध लगा रखा है।

एफएआरसी

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रिवोल्यूशनरी आर्म्ड फोर्सेज ऑफ कोलंबिया या एफएआरसी 1960 से ही कोलंबिया में सक्रिय है। ये संगठन खुद को मार्क्सवादी विचारों पर आधारित गुरिल्ला संगठन मानता है। अपने सैन्य दस्ते को इसने जनसेना का नाम दे रखा है।

हालांकि कोलंबियाई सरकार के लिए इसे अहम खतरा माना जाता है। संगठन पर कोलंबिया में साम्राज्यवाद के विरोध के नाम पर कई नागरिकों की हत्या, अपहरण और बम धमाकों के आरोप हैं। संगठन की सालाना आमदनी तकरीबन 100 से 350 मिलियन डॉलर है।

दी रिचेस्ट डॉट कॉम ने अमीर आतंकी संगठनों की सूची में इसे पांचवें पायदान पर रखा है। संगठन की आमदनी का मुख्य स्रोत फिरौती और नशीली दवाओं का कारोबार है।  

कब सामने आया संगठन-
1964 में एफएआरसी की स्‍थापना कोलंबियन कम्यूनिस्ट पार्टी के सैन्य दस्ते के रूप में हुई थी।

हालांकि कोलंबिया, अमेरिका, कनाडा, चिली, यूरोपीय यूनियन और न्यूजीलैंड इसे आतंकी संगठन मानते हैं, जबकि वे नेजुएला, ब्राजील, अर्जेंटीना, इक्वाडोर और निकारागुआ की सरकारें ऐसा नहीं मानती।

एफएआरसी के लड़ाकों की संख्या कितनी है, ये तय नहीं है। 2007 में संगठन ने दावा किया था कि उसके पास 18 हजार पुरुष और महिला लड़ाकों का दस्ता है। तब कोलंबियाआई सेना का दावा था कि एफएआरसी के पास लगभग 13, 800 लड़ाके हैं।

लश्कर-ए-तैयबा

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भारत में लश्कर-ए-तैयबा जाना पहचाना नाम है। बीते दो दशकों में भारत में हुई कई आतंकी वारदातों में शामिल होने का आरोप इस संगठन पर लगे। भारत सरकार के अनुसार 2001 में संसद पर हमले और 26 नंवबर, 2008 के मुंबई हमलों में भी इसी संगठन का हाथ था।

आरोप है कि लश्कर-ए-तैयबा पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में आतंकी प्रशिक्षण शिविर भी चलाता है। लश्कर-ए-तैयबा का लक्ष्य दक्षिण पूर्व एशिया में इस्लामिक राज्य की स्‍थापना करना और कश्मीर को आजाद कराना है।

दी रिचेस्ट डॉट कॉम ने इस संगठन की सालाना कमाई करीब 100 मिलियन डॉलर (लगभग 61 अरब रुपए) के आसपास आंकी है। वेबसाइट ने अमीर आतंकी संगठनों की सूची में उसे छठें स्‍थान पर रखा है। लश्करे तैयबा की आमदनी का अधिकांश हिस्सा चंदों से आता है। संगठन ने पाकिस्तान में अस्पताल और स्कूल भी खोल रखे हैं।

हालांकि इनका इस्तेमाल भी भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने में किया जाता है।

कब सामने आया संगठन-
1990 में संगठन की स्‍थापना पाकिस्तान के कट्टरपंथी नेता हफीज सईद, अब्दुल्‍ला अज्‍जाम और जफर इकबाल ने अफगानिस्तान में की। हालांक‌ि संगठन का मुख्यालय पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में है।

भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपियन यूनियन, रूस और ऑस्‍ट्रेलिया ने संगठन को प्रतिब‌ंधित कर रखा है। पाकिस्तान ने भी औपचारिक रूप से लश्कर-ए-तैयबा पर प्रतिबंध लगा रखा है।

हालांकि खुफिया एजेंसियों और कई विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआई की मदद से ये संगठन लगातार काम कर रहा है।

बोको हराम

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बोको हराम नाइजीरिया का आतंकी संगठन है। ये आतंकी संगठन वैसे तो धमाकों आदि के लिए लंबे समय से चर्चा में रहा है लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में पिछली गर्मियों में तब आया, जब उसने 200 लड़कियों को अगवा कर लिया।

ये लड़कियां एक आवासीय स्कूल की छात्राएं थीं। पश्चिमी शिक्षा का विरोधी ये संगठन नाइजीरिया में 2009 के बाद से अधिक सक्रिय है। आईएसआईएस की तरह ही बोको हराम भी नाइजीरिया में इस्लामिक मुल्क की स्थापना करना चाहता है।

अल कायदा ने बोका हराम के आतंकियों को प्रशिक्षण दिया है। बोको हराम को अल कायदा फंड भी देता रहा है। गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बोको हराम ने 2009 से 2014 के बीच 5 हजार से अधिक नागरिकों की हत्या की है।

दी रिचेस्ट डॉट कॉम ने दौलतमंद आतंकी संगठनों की सूची में बोको हराम को सातवें पायदान पर रखा है। वेबसाइट के मुताबिक, 2006 से 2011 के बीच इस संगठन ने 70 मिलियन डॉलर (लगभग 4 अरब 27 करोड़ रुपए) कमाए थे। संगठन की कमाई का श्रोत अपहरण और फिरौती है।

कब सामने आया संगठन-
मोहम्‍मद युसुफ ने 2002 में बोको हराम की स्‍थापना एक धार्मिक पंथ के रूप में की थी। बोको हराम का मकसद इस्लामिक शिक्षा को बढ़ावा देना और इस्लमिक स्टेट की स्‍थापना करना था।

ये संगठन प‌श्चिमी शिक्षा का धुर विरोधी है। मोहम्मद युसुफ ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि पृथ्वी गोल है- ये सिद्घांत इस्लाम के खिलाफ है और इस खारिज कर दिया जाना चाहिए।

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