आखिर क्यों हो रहा है नेपाल में भारतीय मीडिया का विरोध?
#GoHomeIndianMedia ट्विटर पर नम्बर एक ट्रेंड करता रहा। इस हैशटैग का उपयोग केवल नेपाल के ही ट्विटर यूजर्स ने नहीं किया बल्कि भारत में भी इसका खूब उपयोग किया गया। लोग कह रहे हैं भारतीय मीडिया ने संवेदनहीन रिपोर्टिंग करने के साथ-साथ एकतरफा कवरेज की है।
सोशल मीडिया पर यहां तक चर्चा है कि एक तरफ तो भारतीय मीडिया ये बताते नहीं थक रही है कि भारत ने नेपाल की बहुत मदद की, लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल की मदद करने वाले देशों में भारत ऊपर के चौदह देशों में भी नहीं है।
भारत में भी हो रहा है मीडिया का विरोध
नेपाल में भारतीय माडिया के विरोध पर कई भारतीय ट्विटर यूजर्स ने ट्वीट कर के अपनी राय दी है कि भारतीय मीडिया हर जगह अपनी नाक कटा के चली आती है। लोगों ने तो यहां तक कहा कि भारतीय मीडिया के सवाल बहुत ही संवेदनहीन है। जिसकी उम्मीद
नहीं की जा सकती है। ट्विटर एकाउंट,आई गरिमा1 ने प्रधानमंत्री मोदी को टैग करते हुये कहा है कि भारतीयों को भी अपनी मीडिया पर शर्म आ रही। अगर आप में आत्मसम्मान है तो कृप्या अपनी मीडिया को वापस बुला लीजिए।
कई लोगों ने भारतीय टेलीविज़न पत्रकारों पर संवेदनहीन होने का आरोप लगाया है और उन्हें सुझाव दिया है कि वे थोड़ा ऐहतियात बरतें। रत्ना विश्वनाथन ने ट्वीट किया कि एक बड़े अंग्रेज़ी चैनल का रिपोर्टर एक महिला से पूछता है कि क्या उसका कोई मरा है, उसके हां कहने के बाद वह यह सवाल दस बार करता है। गौरतलब है कि भूंकप से अब तक 7,000 से ज्यादा जानें जा चुकी हैं, जबकि हजारों बेघर हो चुके हैं।
संवेदनहीनता का आरोप
सोशल मीडिया का आरोप है कि विनाशकारी भूकंप पर भारतीय मीडिया का कवरेज संवेदनहीन है और एकतरफा भी। ये भी आरोप है कि भूकंप कवरेज और भूकंप पीड़ितों को भारतीय मीडिया भारत सरकार को केंद्र में रखकर बतौर ‘पब्लिक रिलेशन’ इवेंट के तौर पर कवर कर रहा है। ट्विटर पर लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि कई न्यूज रिपोर्टरों को भाजपा ज्वाइन कर लेनी चाहिए। अधिकतर ट्वीट्स में इलेक्ट्रानिक मीडिया को बहुत ही संवेदनहीन बताया गया है।
लोग तो यहां तक कह रहें हैं कि आखिर भारतीय लोग अपने मीडिया को झेलते कैसे हैं? ट्विटर पर साजन राजभंडारी ने लिखा, "मुझे हैरानी है कि भारतीय अपने न्यूज़ चैनलों को रोज कैसे देखते हैं। मेरा सिर तो पाँच मिनट में ही चकरा गया"। एक और यूजर ज्ञान लोहनी ने ट्वीट किया, "भारतीय मीडिया की अनैतिक, तथ्यहीन और बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई जा रही ख़बरें स्वीकार्य नहीं हैं"।