फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   That's why church do not let them marry

'...इसलिए चर्च किसी की शादी नहीं होने देता है'

Wed, 18 Mar 2015 09:48 AM IST
अरुण लक्ष्मण
अरुण लक्ष्मण Updated Wed, 18 Mar 2015 09:48 AM IST
विज्ञापन
That's why church do not let them marry

केरल के कैथोलिक समुदाय के एक पूर्व पादरी केपी शिबु ने आरोप लगाया है कि कैथोलिक चर्च पादरियों से ब्रह्मचर्य का पालन करवा रहा है ताकि उसे सस्ते मजदूर मिल सकें। शिबु इस समय केरल कैथोलिक चर्च रिफॉर्मेशन मूवमेंट (केसीआरएम) के संरक्षण वाले पूर्व पादरी और नन एसोसिएशन के नए राष्ट्रीय महासचिव हैं। इसके अध्यक्ष रेजी नजल्लानी हैं।

विज्ञापन


शिबु का कहना है कि चर्च ने उन्हें और उनके परिवार को समाज से भी निष्कासित करवाने की कोशिश की है। उनके परिवार में अभिभावक, दो भाई और एक बहन हैं। लेकिन साइरो-मालाबार बिशप्स कॉन्फ्रेंस पूर्व नन और पादरियों के आरोप को बेबुनियाद बताते हैं। शिबू के पास समाज शास्त्र में एमए डिग्री के साथ ही शिक्षा में स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री है और वह केरल के केसरगोड में दी पॉल कॉलेज के प्रिंसिपल थे।
विज्ञापन


एक सेमिनरी से 12 साल तक शिक्षा लेने के बाद शिबू 12 साल तक पादरी रहे थे। वह कहते हैं कि वह 15 साल की उम्र में कैथोलिक व्यवस्था में शामिल हुए थे और 39 साल की उम्र में इसे छोड़ा। वह कहते हैं कि उन्होंने चर्च इसलिए छोड़ा क्योंकि उन्हें लगा कि चर्च अपने आदर्शों और सिद्धांतों को छोड़कर एक शोषणवादी कंपनी की तरह काम करने लगा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

शिबू ने छोड़ दिया था चर्च

That's why church do not let them marry

शिबू के अनुसार, "विन्सेंटियन समाज के एक बड़े अधिकारी और वरिष्ठ पादरी फादर वर्गीज परापराम्बिल ने उन्हें धमकी दी कि उनके अभिभावकों का अंतिम संस्कार कैथोलिक परंपराओं के अनुसार नहीं किया जाएगा और यह भी कहा मैं अपने परिवार के साथ न रहूं क्योंकि चर्च मेरा हुक्का-पानी बंद कर रहा है।"

लेकिन साइरो-मालाबार बिशप्स कॉन्फ्रेंस के फादर पॉल ठेलेक्काट पूर्व पादरियों और ननों के आरोपों को ठुकराते हैं। वो कहते हैं, "यह बेहूदा आरोप हैं और चर्च इस तरह की चीजों में कभी नहीं उलझता। हम मानते हैं कि पूर्व पादरी और नन कैथोलिक चर्च के ही हिस्से हैं और उन्होंने अपनी जिंदगी यीशु की शिक्षाओं के प्रति समर्पित की है।"

शिबू कहते हैं कि वो अभी भी ईसाई हैं और यीशु मसीह और उनके उपदेशों में उनका भरोसा कायम है। वह कहते हैं कि व्यवस्था से बाहर जाने वाले पादरियों और ननों का सही पुनर्वास होना चाहिए, लेकिन चर्च की व्यवस्था में ऐसा कभी नहीं किया गया। शिबू ने मलयाली में अपनी जिंदगी पर एक किताब भी लिखी है जिसका अब अंग्रेजी संस्करण, "माइ प्रीस्टी लाइफ" छापने की तैयारी है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed