काम नहीं आया मोदी का अमेरिका दौरा, चीन जाने की तैयारी में टेस्ला
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पीएम मोदी बीते माह सितंबर में जब सिलिकॉन वैली के दौरे पर गए थे तो वहां से बड़ी कंपनियों के भारत में निवेश करने की उम्मीद जगी थी।
खुद पीएम मोदी भी बड़ी कंपनियों के सीईओ से मिले थे और उन कंपनियो ने निवेश करने का वादा भी किया था, जिसमें कार की दुनिया में मशहूर टेस्ला मोटर्स भी शामिल थी।
पीएम मोदी ने टेस्ला प्लांट का केवल दौरा ही किया वरन् कंपनी के सीईओ एलन मस्क से मुलाकात भी की, लेकिन मोदी की इन सारी खास कवायदों का कोई खास असर नहीं पड़ रहा है।
राजनीतिक माहौल बनी वजह?
टेस्ला मोटर्स अपनी कारों का प्रोडक्शन शुरु करने वाली है। कंपनी के सीईओ एलन के अनुसार वे चीन में कार उत्पादन का प्लांट लगाने के लिए वहां के अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं और जल्द ही इसका आधिकारिक एलान होगा।
मौजूदा समय में टेस्ला की कारों का उत्पादन कैलिफोर्नियां में होता है। हाल ही में टेस्ला ने नीदरलैंड में असेंबली यूनिट भी शुरु की है। एलन का मानना है कि चीन में कारों का उत्पादन करने से खर्च को एक तिहाई तक कम किया जा सकता है और अगर सब कुछ सही रहा तो अगले तीन साल में टेस्ला की लग्जरी सीडान कार मॉडल एस का उत्पादन शुरु हो जाएगा।
टेस्ला चीन में अपनी यूनिट इसलिए भी खोलना चाहती है क्योंकि चीन कारों का खासा बड़ा बाजार है और बीते साल यहां लगभग 2 करोड़ कारें बिकी। गाड़ियों की वजह से हो रहे प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए भी टेस्ला की इलेक्ट्रिक कारें चीन के बाजार में अपना पांव जमा सकती है।
टेस्ला ने नवंबर 2013 में बीजिंग में एक शो रुम खोला था। टेस्ला के भारत न आकर चीन जाने के फैसले पर जानकारों का मानना है कि यूं तो भारत में भी इलेक्ट्रिक कारों का बाजार बड़ा है लेकिन राजनीतिक माहौल की वजह से वो यहां आने से बच रही है।