मणिपुर हमलाः कहीं चीन-पाक की तो नहीं है साजिश?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मणिपुर में सेना के 18 जवानों की मौत की जिम्मेदारी लेने वाले नेशनल सोसलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (एनएससीएन) के कैपलांग गुट ने केंद्र सरकार के साथ 14 साल से चल रही वार्ता संधि को चीन और पाकिस्तान की शह पर तोड़ दिया था। इतना ही नहीं मणिपुर समेत पूरे पूर्वोत्तर के नागा प्रभाव वाले इलाकों में भारतीय एजेंसियों पर हमला करने के लिए दोनों पड़ोसी देशों की एजेंसियां एनएससीएन (के) सहित अन्य गुटों को भी हथियारों की आपूर्ति कर रही हैं।
बृहस्पतिवार को इस ताजा हमले के बाद गृहमंत्री, रक्षा मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की आपात बैठक में इन्हीं तथ्यों के आधार पर सेना को इन गुटों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए खुली छूट दे दी गई। उधर, पूरे घटना की जांच की जिम्मेदारी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को दी गई है। इन भारत विरोधी उग्रवादियों को सबक सिखाने के लिए पड़ोसी देश म्यांमार की भी मदद ली जा रही है। थल सेना प्रमुख दलबीर सिंह पूरे ऑपरेशन की कमान संभालने के लिए खुद मणिपुर में मौजूद हैं।
सीमा पार से मिलते हैं हथियार और पैसे
गृह मंत्रालय के शीर्षस्थ सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि एनएससीएन (के) के साथ अप्रैल महीने तक वार्ता संधि थी। लेकिन, मियाद से एक महीना पहले मार्च में ही इस गुट ने करार तोड़ दिया। इसके बाद से गुट ने 15 सुरक्षाकर्मियों की जान ली है। गौरतलब है कि एनएससीएन के आइजैक मोविया गुट के साथ केंद्र की बातचीत जारी है।
कैपलांग गुट ने केंद्र को खबर भिजवाया था कि भारत सरकार 14 सालों से उसे बेवकूफ बना रही है। लिहाजा बातचीत से कोई हल नहीं निकलने वाला है। एनएससीएन के दोनों गुट नागाओं के लिए अलग देश की अपनी पुरानी मांग पर अड़े हुए हैं।
सूत्रों के मुताबिक यह गुट पाकिस्तान और चीन को पूर्वोत्तर में सेना की तैनाती और अन्य गतिविधियों की जानकारी भी देता है। इलाके में अशांति बरकरार रखने के लिए इन गुटों को ट्रेनिंग और उन्नत तकनीकी हथियारों के साथ मोटी रकम भी दी जाती है।