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सेना का ऑपरेशन खत्म, तीन आतंकी ढेर
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 26 Sep 2013 08:33 PM IST
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सीमा पार से घुसपैठ कर सेना की वर्दी में आए विदेशी आतंकियों ने बृहस्पतिवार सुबह आतंकी वारदातों को अंजाम दिया। इसमें कुल नौ लोगों की मौत हो गई।
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आतंकियों ने सबसे पहले हीरानगर थाने पर खून की होली खेली। यहां चार पुलिसकर्मियों समेत छह लोग शहीद हो गए। फिर सांबा स्थित सेना की पश्चिमी कमान के कारनेटर वारियार के मुख्यालय पर फिदायीन हमला बोला।
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हमले में लेफ्टिनेंट कर्नल और दो जवानों की मौत हो गई, सीओ समेत तीन सैन्य कर्मी गंभीर रूप से जख्मी हैं।
आठ घंटे से भी अधिक समय तक चली मुठभेड़ के बाद सेना ने तीनों हमलावरों को मार गिराया। आतंकी संगठन शोहदा ब्रिगेड ने हमले की जिम्मेदारी ली है।
पुलिस और सैन्य अफसरों के मुताबिक बृहस्पतिवार तड़के लगभग एक दर्जन आतंकियों ने सांबा सेक्टर के पहाड़पुर के पास से भारतीय सीमा में घुसपैठ की। उनके पास भारी मात्रा में हथियार और गोले थे।
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इनमें से तीन आतंकी सुबह लगभग छह बजे एक आटो से कठुआ जिले के हीरानगर पुलिस थाने पहुंचे। थाने पहुंचने के बाद ऑटो चालक को गोली मारकर घायल कर दिया।
इसके बाद थाने में घुसकर एक-एक कर चार पुलिसकर्मियों की गोली मारकर हत्या कर दी। फिर थाने के बाहर खड़े एक ट्रक के क्लीनर से चलने को कहा।
इस ट्रक को पुलिस ने बुधवार को जब्त किया था। क्लीनर ने आनाकानी की तो उसे गोली से उड़ा दिया।
जम्मू संभाग के आईजी राजेश कुमार के मुताबिक क्लीनर और एक अन्य नागरिक की हत्या के बाद आतंकियों ने ट्रक चालक से ट्रक चलाने को कहा।
ट्रक से वे सांबा की ओर बढ़े। रास्ते में ट्रक को छोड़ दिया, जिसे बरामद कर लिया गया। उसके कश्मीरी ड्राइवर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
ट्रक छोड़ने के बाद आतंकी किसी अन्य वाहन से सांबा सेना कैंप पहुंचे और साइड गेट पर तैनात संतरी की हत्या कर कैंप में दाखिल हो गए।
डीजीपी अशोक प्रसाद ने बताया कि आतंकियों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से एक किलोमीटर दूर झंडी गांव के पास हरिया चौक पर आटो पर कब्जा जमाया था। आतंकियों ने कैंप में आफीसर्स मेस में चंडीगढ़ निवासी लेफ्टिनेंट कर्नल विक्रमजीत सिंह को गोली मार दी।
जवान बी के रेड्डी और श्रीनिवासन भी इस हमले में शहीद हुए। कमांडिंग अफसर ए उथैया भी घायल हुए हैं। इसके अलावा पुलिस के सात जवान शहीद हुए हैं। दो नागरिक भी मारे गए हैं।
शोहदा ब्रिगेड वही संगठन है जिसने जुबिन मेहता के कार्यक्रम को रोकने के लिए हमले की धमकी थी।
कैसे संभाला जवानों ने मोर्चा
आतंकियों के इस डबल अटैक के तुरंत बाद सेना और पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया। जमीन पर सेना के बख्तरबंद टैंक, आधुनिक हथियारों और रॉकेट लांचरों से लैस जवान और आसमान से सेना के हेलीकॉप्टरों ने सैन्य शिविर में घुसे आतंकियों की तलाश शुरू कर दी।
हेलीकॉप्टर से कैंप की वीडियोग्राफी की गई। फिर क्रेकडाउन कमांडो को कैंप के अंदर उतारे गए। मुठभेड़ के क्रम में सेना ने कैंप के अंदर एक भवन को भी विस्फोट से उड़ा दिया, जिसमें आतंकी छिपे थे।
सुबह का समय जवानों की परेड का समय होता है। शिविर के अंदर ही स्कूल में भी बड़ी संख्या में बच्चे थे। ऐसे में सेना की वर्दी में घुसे आतंकियों को पहचानना और पकड़ना बहुत मुश्किल काम था।
इसी कारण ऑपरेशन मुकम्मल होने में इतना वक्त लगा। हमले के तुरंत बाद लखनपुर से जम्मू तक नेशनल हाईवे पूरी तरह सील कर दिया गया। जगह-जगह नाके लगाकर सेना और पुलिस ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाल लिया। हाई अलर्ट जारी कर दिया गया।
सेना, पुलिस और प्रशासन के तमाम आला अफसर मौके पर पहुंचकर आपरेशन की कमान संभाले हुए थे। ऑपरेशन में सेना ने कैंप के अंदर जबकि सीआरपीएफ और पुलिस ने कैंप के बाहर मोर्च संभाला।
'नहीं होनी चाहिए पाकिस्तान से बातचीत'
गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे को खुफिया विभाग प्रमुख और गृह सचिव ने आतंकी हमले की जानकारी दे दी है। वहीं, भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने कहा है कि इस माहौल में पाकिस्तान से बातचीत नहीं होनी चाहिए।
इस हमले की वजह से नवाज से मुलाकात की योजना बना रहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी दबाव में दिख रहे हैं। ऐसा लग रहा है जैसे दोनों नेताओं के बीच 29 सिंतबर को होने वाली मुलाकात टल सकती है। संभावना है कि अगर मुलाकात हुई, तो पीएम कड़े शब्दों में बात करेंगे।