फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   terrorist connection of illegal phone exchange in meerut.

एक्सचेंज का देवबंद से 'आतंकी सिम' कनेक्शन

Thu, 22 Jan 2015 08:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ, सहारनपुर Updated Thu, 22 Jan 2015 08:44 AM IST
विज्ञापन
terrorist connection of illegal phone exchange in meerut.

गणतंत्र दिवस और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत दौर से पहले मेरठ में पकड़े गए अवैध एक्सचेंज की जांच में सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक्सचेंज में प्रयोग किए जा रहे सभी 64 सिम देवबंद के नाम और पते पर एक्टिव हैं। बेहद संवेदनशील देवबंद और मेरठ के इस नये कनेक्शन ने जांच एजेंसियों को भी उलझा दिया है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इस अवैध एक्सचेंज के जरिए वेस्ट यूपी के स्लीपर सेल को एक्टिव किया जा रहा हो। हाल ही में आतंकी गतिविधियों में देवबंद का नाम आने के बाद जांच का यह पहलू पुलिस और अन्य एजेंसियों को भी परेशान कर रहा है।

विज्ञापन


मुजफ्फरनगर दंगों के बाद से ही देवबंद का नाम लगातार आतंकी गतिविधियों में आता रहा है। पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल के सेल के हत्थे चढ़ा अब्दुल सुभान के देवबंद आने की पुष्टि हुई। इसके बाद देवबंद में पढ़ रहे उसके बेटे को भी गिरफ्तार किया गया। सितंबर में सहारनपुर रेलवे स्टेशन से पकड़े गए आतंकी एजाज सईद शेख ने खुलासा किया था कि दो आतंकी देवबंद में छिपे हैं। हाल में ही नोएडा से पकड़े गए आतंकी अजीज के देवबंद कनेक्शन के बाद मेरठ में पकड़ा गया यह अवैध एक्सचेंज स्लीपर सेल को कनेक्ट करने की मुहिम का हिस्सा हो सकता है।
विज्ञापन


देवबंद और मेरठ दोनों ही बेहद संवेदनशील हैं और इनका आपसी कनेक्शन बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। सवाल यह है कि मेरठ के अवैध एक्सचेंज में सभी सिम देवबंद से क्यों लिए गए। मेरठ से देवबंद की दूरी 100 किलोमीटर से ज्यादा है। ऐसे में वहां से लिए गए सिम आतंकी कनेक्शन की ओर इशारा कर रहे हैं। आपको बता दें सहारनपुर में पहले भी स्लीपर सेल और आतंकी गतिविधियों में साठगांठ के मामले सामने आए हैं। वर्ष1994 में लश्कर ए ताइबा से जुड़ा मौलाना मसूद अजहर को छुड़ाने के लिए लश्कर ने पांच ब्रिटिश और एक आस्ट्रेलियन नागरिक का अपहरण कर सहारनपुर में ही बंधक बनाया गया था। यहां नाकाम रहे संगठन ने बाद में इंडियन एयरलाइंस के विमान का अपहरण कर लिया था और कंधार ले गए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


क्या है स्लीपर सेल

स्लीपर सेल अपने मूल प्रदेश या प्रांत में विशेष प्रशिक्षण पाये गुप्त एजेंटों से लैस होता है। हथियार, आधुनिक संचार उपकरण और अन्य साजों सामान से लैस रहने वाले एजेंटों को निशाना बनाने वाले देश या प्रदेश की संस्कृति या समुदाय में खुद को खपाने की जिम्मेदारी देकर भेज दिया जाता है। दहशत फैलाने के साथ आतंकी संगठनों ऐसे ही स्लीपर सेल से खुफिया जानकारी भी प्राप्त करते हैं।

इंटरनेट के जरिए स्थापित किया था अवैध एक्सचेंज

terrorist connection of illegal phone exchange in meerut.

मेरठ में पकड़े गए इंटरनेशनल कॉल नेटवर्क ने एक बार फिर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। अब तक की जांच में इंटरनेट के जरिए प्रोग्रामिंग कर इस तरह के अवैध एक्सचेंज तैयार किए जाते रहे हैं। इससे पहले एटीएस और एसटीएफ ने कुछ साल पहले विभिन्न शहरों में तीन अवैध एक्सचेंज का खुलासा किया था।  मेरठ की छापेमारी में एक्टिवेट सिम देवबंद के नाम और पते पर होने के चलते इस कवायद में आतंकी आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इस मामले में एटीएस ने भी नजरें गढ़ा दी हैं और देवबंद से जुड़े कनेक्शन को खंगालने में जुटी है। उधर, तैयार हुए अवैध एक्सचेंज के पीछे की जांच की जा रही है।

कुछ साल पहले एटीएस ने लखनऊ और कानपुर में भी इस तरह के अवैध टेलीफोन एक्सचेंजों का भंडाफोड़ किया था। एसओजी ने भी आजमगढ़ में ऐसा ही संदिग्ध नेटवर्क को पकड़ा था। इन ऑपरेशन में शामिल रहे अधिकारियों के अनुसार इस तरह के एक्सचेंज तैयार करने के लिए कंप्यूटर पर शातिर दिमाग की जरूरत होती है। इंटरनेट के जरिए प्रोग्राम डेवलप कर एक यूनीक आईएसडी नंबर भी जेनरेट करते हैं। इसके वाइस ओवर आईपी के जरिए इंटरनेशन और नेशनल कॉल किए जा सकते हैं। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथारिटी इंडिया में वाइस ओवर आईपी पूर्णतया प्रतिबंधित है। कारण, इससे होने वाले कॉल का रिकार्ड नहीं होता है। इससे होने वाले कॉल को सर्विलांस पर आदि पर नहीं लिया जा सकता। ऐसे में इस एक्सचेंज के जरिए संदिग्ध काल भी कराई जाए तो उसे पकड़ा जाना मुश्किल होता है।

दंगों के बाद पकड़ी थी सेटेलाइट कॉल
मुजफ्फरनगर दंगों के बाद सहारनपुर में सेटेलाइट कॉल पकड़ी गई थी। एयरफोर्स स्टेशन के आसपास से किए सेटेलाइट काल का खुलासा तो हुआ, लेकिन इस मामले को खंगाला नहीं गया था। ऐसे में सवाल यह है कि इस तरह के नेटवर्क आदि का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों में भी किया जा सकता है।

देवबंद से खरीदे गए थे सभी 64 सिम कार्ड

terrorist connection of illegal phone exchange in meerut.

मेरठ के गंगानगर में पकड़े गए अवैध एक्सचेंज पर आईएसडी कॉलिंग के लिए जो सिम कार्ड इस्तेमाल किए जा रहे थे, वो देवबंद से खरीदे गए थे। इस मामले में शनिवार को क्राइम ब्रांच टीम ने देवबंद में दबिश देकर बीएसएनएल के एक संविदा कर्मी को गिरफ्तार कर लिया। सिम विक्रेता का नाम भी पुलिस को मालूम चल गया है। इधर, कमरा किराये पर लेने वाले हरीश और निशांत की तलाश में एक टीम दिल्ली भेजी गई। मामले में आतंकी कनेक्शन तलाशने के लिए खुफिया विभाग की अलग-अलग इकाइयां और एटीएस भी छानबीन में लगी है। उधर, गिरफ्तार आरोपी विकास चौहान को पुलिस ने मुरादाबाद स्थित कोर्ट में पेश किया।

शुक्रवार को संचार विभाग की टर्म सेल टीम ने पुलिस, फोरेंसिक एक्सपर्ट और क्राइम ब्रांच को साथ लेकर गंगानगर ए ब्लॉक में मकान नंबर-271 पर छापा मारा था। मकान में छत पर बने कमरे में अवैध एक्सचेंज पकड़ा गया था, जहां से अवैध तरीके से इंटरनेट के जरिये आईएसडी कॉल कराई जा रही थी। कुछ कॉल ट्रैस होने के बाद इसका खुलासा हुआ था। अवैध एक्सचेंज में इस्तेमाल हो रहे तमाम उपकरण समेत 64 सिम कार्ड पुलिस ने कब्जे में ले लिए। इस एक्सचेंज में ई-नेट सोल्यूशन कंपनी का नेट कनेक्शन देने वाले विकास चौहान निवासी बहचौला (मवाना) को गिरफ्तार किया गया है। उसी ने बताया था कि कमरा हरीश और निशांत नामक युवकों ने किराये पर लिया था, जिन्होंने दिल्ली के पश्चिम विहार की आईडी दी थी। देर रात इंचौली थाने पर संचार विभाग के जेटीओ देवेंद्र सिंह की ओर से विकास चौहान, हरीश और निशांत के खिलाफ आईटी एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।

मामचंद नहीं आया हाथ:
उधर, छानबीन में मालूम चला कि बरामद सभी सिम देवबंद के किसी मामचंद के यहां से खरीदे गए थे। मामचंद बीएसएनएल का डीलर है। उसे पकड़ने के लिए क्राइम ब्रांच की टीम शनिवार सुबह देवबंद गई, मगर वह हाथ नहीं आया। हरीश और निशांत ने कमरा किराये पर लेते वक्त ड्राइविंग लाइसेंस दिया था, जो फर्जी निकला है। बावजूद इसके क्राइम ब्रांच की एक टीम दिल्ली भी भेजी गई है, ताकि वहां से इनके नाम-पते के बारे में सही जानकारी की जा सके। ऐसी आशंका है कि 64 सिम कार्डों से पाकिस्तान और खाड़ी देशों में कॉल हुई, जो आतंकी कनेक्शन की तरफ इशारा करते हैं। इस लिहाज से खुफिया विभाग के अलावा एटीएस की टीम ने भी देर रात और शनिवार सुबह विकास से लंबी पूछताछ की।

आतंकी गतिविधियों की जांच:
दोपहर में क्राइम ब्रांच ने देवबंद से बीएसएनएल के एक संविदाकर्मी को गिरफ्तार कर लिया। सहारनपुर के पुलिस अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की। वहीं, आशंका है कि फर्जी आईडी पर लिए गए सिम का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों में हुआ है, क्योंकि अवैध एक्सचेंज के जरिए खाड़ी देशों और पाकिस्तान में आईएसडी कॉलिंग कराई जा रही थी। पुलिस और खुफिया तंत्र भी अपने स्तर पर देवबंद में जांच में जुट गया है।

तीन की संलिप्तता की जांच:
मामले में एसएसपी ओंकार सिंह ने बताया कि शनिवार सुबह आरोपी विकास चौहान को मुरादाबाद कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। मामले में ई-नेट सोल्यूशन कंपनी के हेड गौतम सहगल, मकान मालिक और सहारनपुर के एक व्यक्ति को लेकर जांच चल रही है कि उनका इस प्रकरण में किस स्तर से संबंध रहा, यदि संलिप्तता मिलती है तो इनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed