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आर्मी टीम पर उग्रवादियों का हमला, 20 जवान शहीद

Fri, 05 Jun 2015 08:42 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 05 Jun 2015 08:42 AM IST
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Terrorist attack on Army team in Manipur.

मणिपुर के चंदेल जिले में बृहस्पतिवार को घात लगाकर किए गए उग्रवादियों के हमले में सेना के 20 जवान शहीद हो गए, जबकि 11 सैनिक घायल हुए हैं। तीन जवानों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

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उग्रवादियों ने रॉकेट से दागे जाने वाले ग्रेनेड (आरपीजी) और स्वचालित हथियारों से हमला किया। 6 डोगरा रेजीमेंट की टुकड़ी रोजाना की तरह इम्फाल से 80 किमी दूर टेंगनाउपाल-न्यू समतल रोड पर रोड ओपनिंग गश्त (आरओपी) पर निकली थी कि उग्रवादियों ने हमला कर दिया।
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उग्रवादियों ने पहले इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) से विस्फोट किया। इसके बाद सेना के चार वाहनों पर आरपीजी और स्वचालित हथियारों से अंधाधुंध गोलीबारी करने लगे। पुलिस ने एक संदिग्ध उग्रवादी के भी मारे जाने का दावा किया है।
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हमले को सुबह 9 बजे पारालांग और चारोंग गांवों के बीच अंजाम दिया गया। घायल जवानों को हेलीकॉप्टरों के जरिए नगालैंड पहुंचाया गया। फिलहाल किसी भी संगठन ने इस वारदात की जिम्मेदारी नहीं ली है।  

पीएलए पर है शक
मणिपुर के गृह सचिव जे सुरेश बाबू को शक है कि बृहस्पतिवार को हुए हमले के पीछे पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) का हाथ हो सकता है।

1978 से सक्रिय यह उग्रवादी संगठन मैती, नगा और कुकी कबीलों को एकजुट कर मणिपुर की आजादी चाहता है। इसके म्यामार में दो और बांग्लादेश में पांच ट्रेनिंग कैम्प बताए जाते हैं। कांगलेई यावोल काना लूप (केवाईकेएल) नामक उग्रवादी संगठन का भी हमले में हाथ हो सकता है। यह संगठन मणिपुर में सांस्कृतिक एकता लाने के मकसद से बना था। बताया जाता है कि यह कई उग्रवादी संगठनों की मदद करता रहा है। खासकर चंदेल जैसे पहाड़ी इलाकों में इस संगठन की सक्रियता है।

कैसे बच निकलते हैं उग्रवादी
मणिपुर के चूड़ाचंद्रपुर, चंदेल और उखरूल जिले से म्यामांर की 398 किलोमीटर लंबी सीमा सटी है। पहाड़ी इलाका होने के कारण कई बार उग्रवादी हमलों को अंजाम देकर सीमा के दूसरी ओर चले जाते हैं। 2014 में म्यामांर में 2000 उग्रवादियों ने शरण ले रखी थी। इन उग्रवादियों को अधिकतर हथियार चीन के अवैध कारोबारियों से मिलते हैं।


इस हमले की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निंदा की है। वहीं रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि दुख की इस घड़ी में मैं शहीदों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं। जिन्होंने भी इस कायरतापूर्ण हमले को अंजाम दिया है, उन्हें सजा दी जाएगी। सेना राज्य में शांति बहाल करने के काम में जुटी रहेगी।

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