पेशावरः बच्चों के सामने टीचर को जिंदा जलाया, 141 की मौत
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खौफनाक, हैवानियत, दरिंदगी या वहशीपन..., सच्ची तस्वीर बयां करने को आज ये शब्द भी बहुत हल्के लग रहे हैं। पाकिस्तान के पेशावर के आर्मी स्कूल में पाक तालिबानी आतंकियों ने हैवानियत की सभी हदें पार करते हुए 141 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। रेडियो पाकिस्तान के अनुसार इनमें 132 से ज्यादा बच्चे हैं।
हमले में 125 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। सेना की वर्दी पहने 9 आतंकी मंगलवार सुबह स्कूल के पीछे की दीवार फांदकर अंदर घुसे और एक-एक क्लास में घुसकर बच्चों पर अंधाधुंध फायरिंग की। यही नहीं जब एक टीचर ने बच्चों को बचाने की कोशिश की, तो उन्होंने उसे जिंदा ही जला दिया और बच्चों को यह खौफनाक मंजर देखने को मजबूर किया।
हालांकि मंगलवार सुबह करीब 10.30 बजे (पाकिस्तानी समयानुसार) स्कूल में दाखिल हुए सभी नौ आतंकियों को करीब आठ घंटे चले सेना के अभियान में मार दिया गया है। इनमें से अधिकतर आत्मघाती हमलावर थे, जिन्होंने बच्चों के पास जाकर खुद को उड़ा लिया। पाकिस्तानी तालिबानी गुट ‘तहरीक-ए-तालिबान’ ने हमले की जिम्मेदारी ली है।
बच्चों को लाइन में लगाकर मारी गोली
घटना के बाद पाकिस्तान में तीन दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित कर दिया गया है। हालिया समय में मासूम बच्चों पर किया गया यह अब तक का सबसे बड़ा हमला है। करीब आठ घंटे तक स्कूल में खूनी खेल चलता रहा। आतंकियों ने बच्चों की बुरी तरह से पिटाई भी की। चारों ओर बिखरी लाशों के बीच मासूम बच्चों की चीख पुकार हर किसी के कलेजे को चीरती रही।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आतंकी देखने में विदेशी लग रहे थे और अरबी भाषा में बात कर रहे थे। आतंकियों को स्पष्ट निर्देश थे कि उन्हें खासतौर से बड़े बच्चों को निशाना बनाना है। जिस समय आतंकियों ने हमला बोला, उस समय 500 से ज्यादा छात्र व टीचर स्कूल में मौजूद थे। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, उन्होंने ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दी।
एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक एक आतंकी ने बच्चों को लाइन में लगने को कहा, ताकि वह उन्हें गोली मार सके, लेकिन बेचारे बच्चों को लगा कि अंकल कोई गेम खिला रहे हैं। बहुत से बच्चे स्कूल के पिछले गेट से भाग निकलने में सफल रहे। आर्मी स्कूल सेंट मैरी हाई स्कूल के पास है, दो दिन पहले इस स्कूल पर हमला करने की धमकी दी गई थी।
‘यह तो बस एक ट्रेलर था’
आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे सेना के ऑपरेशन ‘जर्ब-ए-अज्ब’ के जवाब में पाक तालिबान ने यह हमला किया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने इस भयावह घटना को ‘राष्ट्रीय त्रासदी’ करार दिया है और बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि ऑपरेशन ‘जर्ब-ए-अज्ब’ आगे भी जारी रहेगा।
वहीं तालिबानी प्रवक्ता उमर खुरासानी का कहना था कि ‘हमने स्कूल को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि सरकार हमारे परिवार और महिलाओं पर हमला कर रही है। जो दर्द हमने सहा है, हम उसका अहसास कराना चाहते थे।’
पाक तालिबानी गुट तहरीक-ए-तालिबान ने हमले की जिम्मेदारी ली। गुट के प्रवक्ता उमर खुरासानी ने कहा, ‘यह उन लोगों के लिए तोहफा है, जो सोचते हैं कि उत्तरी वजीरिस्तान में कथित मिलिट्री ऑपरेशन चलाकर उन्होंने हमें कुचल दिया गया है। पाकिस्तानी सेना कभी भी हमारी क्षमता को सही ढंग से नहीं आंक सकती। हम अभी भी बड़े हमले करने की ताकत रखते हैं। यह हमला तो बस एक ट्रेलर था।’
आखिर क्यों किया हमला
पाकिस्तानी सेना ने पाकिस्तानी तालिबान और उत्तरी वजीरिस्तान के आतंकियों के खिलाफ जर्ब-ए-अज्ब नाम से ऑपरेशन चलाया हुआ है। सेना इस ऑपरेशन को काफी सफल भी मान रही है। इसी साल जून में शुरू हुए इस ऑपरेशन के तहत अब तक 1600 से ज्यादा आतंकियों को मारा जा चुका है। इसी ऑपरेशन के जवाब में पाकिस्तानी तालिबान ने इस नरसंहार को अंजाम दिया है।
बच्चे ही क्यों निशाने पर
पाक सेना के ऑपरेशन से आतंकियों में बौखलाहट थी। खासतौर से सेना से वे बदला लेने की फिराक में थे, लेकिन सेना के कैंप पर हमला करने के लिए उन्हें ज्यादा तैयारी के साथ जाना पड़ता। इसलिए उन्होंने आर्मी स्कूल में पढ़ रहे सैनिकों के परिजनों को निशाना बनाया। पेशावर का यह इलाका अफगानिस्तान सीमा के पास है, जहां तालिबानी आतंकियों का वर्चस्व है। इसी को कायम रखने के लिए उन्होंने यहां हमला किया।
‘मेरे सपने का खून कर दिया’
अपने 14 वर्षीय बेटे की लाश को लेने अस्पताल पहुंचे बेसुध अब्दुल्लाह के मुंह से बस यही निकला, ‘मेरा बेटा मेरा सपना था। उन्होंने मेरे सपने का खून कर दिया। सुबह मैंने उसे देखा था, तो यूनिफॉर्म में बहुत सुंदर लग रहा था, लेकिन अब वह ताबूत में सोया हुआ है।’
छात्र इरफान शाह ने बताया कि हमारे सहपाठी को हम सबके सामने गोली मार दी गई...मैंने महसूस किया की गोली मेरे सिर के बगल से निकली। फायरिंग होते ही शिक्षक ने हमें किसी तरह क्लास से बाहर निकलने को कहा और हम स्कूल के पिछले गेट की तरफ भागे। वहां हम अपनी स्कूल वैन में जाकर बैठ गए, लेकिन हमारे साथियों की जान चली गई। वैन के ड्राइवर ने बताया कि हमारे साथी जन्नत चले गए।
‘हर ओर दोस्तों की लाश थी’
आतंकी हमले से बचकर बाहर निकले एक छात्र ने अंदर के खौफनाक मंजर को बयां करते हुए कहा, ‘जब हम क्लास से बाहर निकलकर आ रहे थे, तो हमने देखा कि गलियारे में हर ओर हमारे दोस्तों की लाशें बिखरी पड़ी थी। उनका खून बह रहा था। किसी को तीन बार गोली मारी गई थी, तो किसी को चार बार।’
20 मिनट में मिट्टी हुई 20 साल की मेहनत
पीड़ित छात्र के एक परिजन ने अपने दर्द को साझा करते हुए कहा, ‘एक बच्चे को बड़ा करने में 20 साल लग जाते हैं और आतंकियों को उन्हें मारने में 20 मिनट भी नहीं लगे।’