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लोगों की जान बचा रहा था 'मालेगांव धमाके' का आरोपी

Sat, 03 Jan 2015 09:03 AM IST
Updated Sat, 03 Jan 2015 09:03 AM IST
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Terror accused saving life lives on new year eve

(साभार: इंडियन एक्सप्रेस)

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31 दिसंबर की देर शाम जब सभी लोग नए साल का जश्न मना रहे थे उसी वक्त डॉ. सलमान फारसी एक छोटे से विस्फोट में घायल हुए लोगों का इलाज कर रहे थे, उनका ब्लड प्रेशर नाप रहे थे और उनके बहते खून को रोकने की कोशिश कर रहे थे।

सड़क पर सरपट दौड़ रही यह एंबुलेंस घायल लोगों को मालेगांव के सिविल हास्पिटल की तरफ ले जा रही थी। आपको बता दें कि इस एंबुलेंस में मरीजों की तीमारदारी में लगा डॉक्टर कोई और नहीं बल्कि साल 2006 को मालेगांव में हुए बम धमाकों का आरोपी था।
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पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक 31 दिसंबर की शाम को जंगली जानवरों को मारने के लिए टांगे गए एक थैले को छूने से हुए विस्फोट में दो लोग बुरी तरह से घायल हो गए थे। पुलिस ने जांच के बाद पाया कि 'पारधी' जनजाति के लोग जंगली जानवरों को मारने के लिए इस तरह का धमाका किया करते हैं।

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घायलों की तीमारदारी में जुटे फारसी

Terror accused saving life lives on new year eve

इस धमाके में घायल हुए गड़रिए और किसान को पहले प्राथमिक उपचार केंद्र ले जाया गया। फिर एक एबुलेंस डॉ. फारसी को लेकर प्राथमिक उपचार केंद्र पहुंचती है। आपको बता दें कि डॉ फारसी ने 2 महीने पहले ही भारत विकास ग्रुप में इमरजेंसी डॉक्टर के तौर पर ज्वाइन किया था।

डॉ. फारसी ने बताया,"दोनों घायल बुधवार की दोपहर अपनी भेड़-बकरियां चरा रहे थे और तभी उनकी निगाह पेड़ पर लटके प्लास्टिक बैग से पड़ी। दोनों ने अपने डंडे से उसे हाटाने की कोशिश की और ब्लास्ट हो गया।" फारसी ने बताया कि दोनों के चेहरे, गर्दन, हाथ, पैर और जांघें जख्मी हो गई हैं। हालांकि उन्होंने बताया कि दोनों की हालत स्थिर है।"

मालेगांव धमाके में 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था

Terror accused saving life lives on new year eve

गौरतलब है कि मालेगांव बम धमाकों के आरोप में 9 मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया गया था। डॉ. फारसी भी उनमें से ही एक थे। उन्होंने सजा के तौर पर महाराष्ट्र की जेलों में 5 साल बिताए।

हालांकि बाद में एनआईए की जांच में पता चला कि ब्लास्ट दरअसल एक हिंदू चरमपंथी संगठन ने करवाया था। एनआईए के खुलासे के बाद डॉ. फारसी को जमानत पर रिहा कर दिया गया।

जेल बाहर फारसी के लिए मुश्किल था जॉब पाना
डॉ फारसी ने बताया कि जेल से बाहर आने के बाद उनके लिए सबसे मुश्किल काम जॉब पाना था। उन्होंने बताया कि जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने कई मस्जिदों में नवाजें अता कीं यहां तक कि भेंडे भी चराईं। उन्होंने बताया कि उन्हें नौकरी मिलने में काफी लंबा वक्त लग गया।

डॉ फारसी के बारे में अंतिम फैसला आना अभी बाकी

Terror accused saving life lives on new year eve

वहीं मालेगांव ब्लास्ट के बारे में दो एजेसिंयों ने अलग-अलग आरोपी तय किए हैं। ऐसे में कोर्ट द्वारा डॉ. फारसी और बाकी 8 आरोपियों के बारे में आखिरी फैसला दिया जाना अभी बाकी है।

फिलहाल के लिए डॉ. फारसी जेल से बाहर हैं और अपने मरीजों का नियमित इलाज कर रहे हैं साथ ही वो तय तारीखों पर पेशी के लिए कोर्ट में भी जाते हैं।

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