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मेरठ गैंगरेप: तनाव के कारण दहशत

Sun, 10 Aug 2014 05:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ Updated Sun, 10 Aug 2014 05:23 PM IST
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tension in kharkhauda

खरखौदा प्रकरण में नई कहानी के साथ गिरफ्तार आरोपी कलीम को अदालत ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। वहीं शनिवार शाम गाजियाबाद स्थित अस्पताल से छुट्टी मिलने पर पीड़िता अपने घर आ गई। इधर, पीड़िता के परिजनों से मिलने पहुंचे जद (यू) महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि घटना गंभीर है। इसे राजनीतिक अखाड़ा न बनने दें।

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अपहरण के बाद गैंगरेप और जबरन धर्म परिवर्तन कराने के मामले में पुलिस ने शुक्रवार को उलधन निवासी कलीम को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने खुलासा किया कि 23 जुलाई को कलीम ने पीड़ित युवती को अपनी पत्नी बताते हुए मेरठ मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन कराया था। इसके बाद शनिवार शाम पांच बजे खरखौदा थाना पुलिस ने कलीम को न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय श्रीमती शगुन पंवार की कोर्ट में पेश किया। कोर्ट में उसका न्यायिक रिमांड आईपीसी की धारा-376घ, 363, 366, 420, 467, 468, 471 के तहत बनावाया गया। कोर्ट ने 20 अगस्त तक आरोपी कलीम को न्यायिक हिरासत में भेजा।
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न्यायालय की गरिमा भूली पुलिस:             
आरोपी कलीम को जब कोर्ट में लाया गया, तो उसकी सुरक्षा में पुलिस बल तैनात था। मीडिया वाले भी थे। पेशी के दौरान कोर्ट में जब अन्य मामलों की सुनवाई चल रही थी, तभी पुलिस वाले आरोपी को लेकर न्यायिक अधिकारी की कुर्सी के पास आ गए और उनके पीछे से स्टेनो के कमरे में होते हुए उसे ले गए। आरोपी कलीम का मुंह कपड़े से ढंका था। इसे देख वकीलों ने नाराजगी जाहिर की। वकीलों ने इसे न्यायिक अधिकारी और कोर्ट की गरिमा के खिलाफ बताया। इस पर न्यायिक अधिकारी ने वहां मौजूद न्यायिक कर्मचारियों और पुलिस वालों को तल्ख लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि आगे से इस तरह का कृत्य न हो।
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हाईकोर्ट जाने की तैयारी:
खरखौदा में बेटी बचाओ संघर्ष समिति की मीटिंग हुई। इसमें पुलिस अफसरों के बयानों की निंदा की गई और हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला लिया गया। पुलिस आरोपी सनाउल्ला और शानू को छह दिन बाद भी गिरफ्तार नहीं कर पाई है। इससे लोगों में नाराजगी है। एसएसपी ओंकार सिंह का कहना है कि सही साक्ष्यों के आधार पर विवेचना चल रही है। कलीम को इस आधार पर ही गिरफ्तार किया गया।

मामले को सियासी रंग न दें:
दोपहर में जनता दल (यू) के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी खरखौदा पहुंचे। गांव में पीड़िता के परिजनों से बातचीत कर न्याय दिलाने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि प्रकरण को राजनीतिक रंग न दिया जाए। दोनों समुदायों के लोग समझदारी का परिचय दें।

खरखौदा से पलायन कर रहे लोग

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गैंगरेप और जबरन धर्म परिर्वतन की घटना के बाद तनाव के कारण लोग दहशत में हैं। मेरठ के खरखौदा कस्बे के एक परिवार ने पलायन कर दिया, जबकि पांच परिवार मकान में ताला बंद कर कहीं रिश्तेदारी में चले गए हैं। हालांकि, पुलिस पलायन की बात से इनकार कर रही है।

तीन अगस्त को थाने पहुंची युवती और उसके परिजनों के समर्थन में लोगों ने हंगामा किया था। इससे इलाके में तनाव व्याप्त हो गया था। उसी रात कस्बा के मोहल्ला बीट पट्टी पर रहने वाले चार मकानों पर पथराव हुआ और दरवाजे तोड़ दिए गए थे। इसके दो दिन बाद कैली में जुलूस के दौरान मारपीट हुई। इससे तनाव और बढ़ गया। इसी कारण लोग पलायन को मजबूर हो गए हैं। शनिवार को मोहल्ला बीच पट्टी निवासी बरकत अली मिनी ट्रक में सामान भरकर ले गए और मकान पर ताला लगा दिया। इसके अलावा शकील पुत्र इशहाक, इंतजार पुत्र लियाकत, वकील पुत्र इशहाक, इंतजार पुत्र अहसान और अख्तर पुत्र काले अपने मकान में ताला बंद कर रिश्तेदारी में चले गए हैं।

पुलिस बोली- काम से गए होंगे
उधर, सीओ किठौर श्वेताभ पांडेय ने दावा किया है कि किसी ने पलायन नहीं किया है। हो सकता है कि लोग किसी जरूरी काम से अपनी रिश्तेदारी में गए हों। पलायन हुआ है, तो वह लोगों से बातचीत करेंगे। कस्बे में शांतिपूर्ण माहौल है। अन्य मोहल्लों में भी दोनों समुदायों के लोग आराम से रह रहे हैं। उनका कहना है कि लोग अफवाहों पर ध्यान न दें, बल्कि शांति से रहें। किसी को दिक्कत है, तो वह पुलिस को सूचना दे।

मेडिकल कॉलेज में कई लोग मिले थे पीड़िता से

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गैंगरेप पीड़िता के मामले में पुलिस और प्रशासन के साथ लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कॉलेज फूंक-फूंककर कदम रख रहा है। पीड़िता को भर्ती करने से लेकर रिलीव होने तक की सीसीटीवी फुटेज निकाल ली गई है। पुलिस को इसकी सीडी भी उपलब्ध करा दी गई है। हालांकि, मेडिकल कॉलेज प्रशासन पूरे मामले में कुछ भी कहने से बच रहा है। लेकिन साक्ष्य एकत्र करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है। पीड़िता की ट्रीटमेंट फाइल को भी कॉलेज स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल चिकित्सालय प्रशासन ने कार्यालय में जमा करा लिया है।

सूत्रों के मुताबिक, 23 से 27 जुलाई के दौरान कई लोग पीड़िता से मिलने आए थे। भर्ती कराने के समय उसके साथ दो लोग सीसीटीवी फुटेज में नजर आए हैं। वहीं 27 जुलाई को जिस वक्त उसे रिलीव कराया गया, उसके साथ में चार से पांच लोग थे। सूत्रों का दावा है कि 27 जुलाई को सुबह करीब 10:37 बजे उसे गायनिक वार्ड से रिलीव किया गया। वार्ड के बाहर गैलरी में लगे सीसीटीवी कैमरे में पीड़िता और उसके साथ मौजूद लोगों की तस्वीर कैद हुई है।

पुलिस कर सकती है पूछताछ:

जो लोग सीसीटीवी फुटेज में नजर आए हैं, पुलिस उनसे भी पूछताछ कर सकती है। यह इसलिए भी अहम है, क्योंकि उन लोगों का पीड़िता से क्या संबंध है? सभी कलीम के साथ थे या फिर पीड़िता भी उन्हें जानती है? इस मामले में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता पहले ही कह चुके हैं कि पुलिस को पूरा सहयोग दिया जाएगा।

सनाउल्ला, शानू का सुराग नहीं लगा पाई पुलिस

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हापुड़ में 29 जून को गैंगरेप और फिर 29 जुलाई को अपहरण के बाद गढ़मुक्तेश्वर में धर्मांतरण हुआ। दोनों ही तारीखों के घटनाक्रम में सनाउल्ला और शानू मुख्य आरोपी हैं। पुलिस ने भले ही केस से जुड़े छह आरोपियों को जेल भेज दिया हो, मगर इन दोनों का सुराग नहीं लगा पाई। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या पुलिस सियासी दवाब में काम कर रही है या जानबूझकर मामले को घुमा रही है।

161 और फिर 164 के बयानों में भी पीड़िता ने सनाउल्ला के बारे में बहुत कुछ बताया। 29 जून को जब पीड़िता अपनी सहेली निशात के साथ हापुड़ तहसील चौराहे पर पहुंची, तो कार में नवाब, सनाउल्ला, हाफिज और शानू मिले। कार में बैठाकर युवती को बुलंदशहर रोड स्थित मदरसे में ले गए और रास्ते में छेड़छाड़ की। मदरसे में शानू और नवाब ने बलात्कार किया, जबकि सनाउल्ला ने छेड़छाड़ की। 23 जुलाई को सनाउल्ला और नवाब ही युवती को बुर्का पहनाकर पैथोलॉजी लैब ले गए। अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान भी दोनों आते-जाते रहे।

इसके अलावा 29 जुलाई को नवाब और सनाउल्ला ने उसे अगवा किया और अपने घर में कैद रखा। गढ़मुक्तेश्वर ले जाने के बाद सनाउल्ला ही युवती को लेकर मेरठ होते हुए मुजफ्फरनगर स्थित मदरसे में ले गया। पूरे घटनाक्रम में सनाउल्ला मुख्य आरोपी रहा, मगर अब तक पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई है। पुलिस अधिकारी दावा करते हैं कि सनाउल्ला को पकड़ने के लिए कई टीमें लगाई गई हैं, जो हापुड़, दिल्ली और गुडगांव में दबिश दे चुकी है। इसके बाद भी सनाउल्ला गिरफ्त से बाहर है।

पहले भी छेड़छाड़ करता था शानू:
शानू बेहद शातिर है। वह पहले से युवती पर बुरी नजर रखता था। युवती ने बयानों में कहा है कि जब वह मदरसे में पढ़ाने जाती थी, तो शानू वहां आता था। उससे छेड़छाड़ करता था। तब उसने सनाउल्ला से इसकी शिकायत भी की थी, मगर नजरअंदाज किया गया। उससे कहा कि शानू को समझा देंगे, मगर समझने की बजाय हैवानियत पर उतर आया। हापुड़ में जब गैंगरेप किया गया, तो शानू ने उसे धमकी देकर कहा कि मैं बहुत बड़ा बदमाश हूं, तेरे पूरे परिवार को मार दूंगा।

हाफिज कौन, ये भी पता नहीं किया:
युवती के बयान में आरोपियों के नाम स्पष्ट हैं। मगर पुलिस हापुड़ के हाफिज के बारे में तस्वीर साफ नहीं कर रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि छह दिन बाद तक जब हाफिज के नाम का पता नहीं लगाया गया, तो उसकी गिरफ्तारी कैसे होगी।

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