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दिल्ली चुनाव की 10 खास बातें, जिन्हें आप जानना चाहेंगे!

Wed, 11 Feb 2015 03:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 11 Feb 2015 03:15 PM IST
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10 Key take aways of Delhi Elections 2015

तमाम ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह रही दिल्ली ने एक बार फिर इतिहास रचा है। राजधानी में चली आम आदमी पार्टी (आप) की आंधी में तमाम दिग्गज धराशायी हो गए हैं। पार्टी ने 70 सदस्यीय विधानसभा की 67 सीटों पर कब्जा कर अश्वमेध रथ पर सवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की भाजपा को ऐसी पटखनी दी है जिसे संभवत: इतिहास कभी नहीं भुलाएगा। इतना ही नहीं, एक साल पहले तक दिल्ली के ताज को ‘विरासत’ समझने वाली कांग्रेस, ‘आप’ की आंधी में लापता हो गई है।

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इस सियासी सुनामी का ही असर है कि भाजपा की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी चुनाव जितवाना तो दूर खुद पार्टी के अब तक के अभेद्य रहे दुर्ग कृष्णानगर से चुनाव हार गई हैं। बेदी ही नहीं भाजपा के तमाम दिग्गज अपनी सीट बचाने में नाकामयाब रहे। गरीब और झुग्गी झोपड़ियों में पैठ रखने वाली आप ने दिल्ली की सभी पॉश कॉलोनियों की सीटें जीतकर विरोधियों के साथ राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। नतीजों से साफ है कि राजधानी के सभी तबकों का व्यापक समर्थन केजरीवाल को मिला है और भाजपा की ताकत रहे मध्यम वर्ग ने भी इस चुनाव में उसे अंगूठा दिखाया है।
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बीते साल लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद नेता प्रतिपक्ष का पद देने को लेकर उसे मुंह चिढ़ाने वाली भाजपा आज दिल्ली विधानसभा में उससे भी बुरी स्थिति में आ गई है। उसे इस पद के लिए जरूरी सात सीट की आधी भी नहीं हासिल हो पाई हैं। चुनाव जीतने के साथ ही केंद्र सरकार ने दिल्ली के अगले मुख्यमंत्री केजरीवाल को जेड प्लस सुरक्षा भी उपलब्ध करा दी है। यह आप की सुनामी का ही असर था कि अरविंद केजरीवाल को नक्सली, भगोड़ा बता कर तीखे हमले की शुरुआत करने वाले पीएम मोदी ने न केवल उन्हें जीत की बधाई दी, बल्कि उन्हें चाय पर भी आमंत्रित किया है।

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2. विपक्ष में फूंकी नई जान

10 Key take aways of Delhi Elections 2015

भाजपा की जीत का सिलसिला रुकने से उत्साहित और खुश कांग्रेस ने खुद का सूपड़ा साफ हो जाने के गम को भुलाते हुए जहां केजरीवाल को बधाई दी, वहीं परिणाम से जोश में आए सभी विपक्षी दलों के नेताओं ने भी इस जीत पर आप को हाथों हाथ लिया है। सारी ताकत झोंकने के बाद भी करारी हार से जहां भाजपा में हताशा है वहीं इस नतीजे ने लोकसभा चुनाव के बाद से पस्त पड़े विपक्ष में नई जान फूंक दी है। मंगलवार को नतीजे आने की शुरुआत होने के साथ ही हार-जीत के तमाम कीर्तिमान ध्वस्त होते गए।

हालांकि, सभी एग्जिट पोल और सर्वे में आप की जीत की भविष्यवाणी की गई थी, मगर इतनी बड़ी जीत का अनुमान किसी ने नहीं किया था। खुद आप का अनुमान अधिकतम 50 के आसपास सीटें हासिल करने का था। आप ने दिल्ली में सबसे बड़ी जीत का कीर्तिमान बनाया वहीं भाजपा ने सबसे बड़ी हार का। चुनाव में अपना सूपड़ा साफ करा कर कांग्रेस ने भी अपने लिए शर्म का कीर्तिमान बनाया।

3. भाजपा की हार की 5 वजहें

10 Key take aways of Delhi Elections 2015
1. दिल्ली के जमीनी नेताओं को किया दरकिनार, पार्टी कार्यकर्ताओं में गया बेहद खराब संदेश
2. स्थानीय मुद्दों पर बात करने की बजाय भाजपा का शीर्ष नेतृत्व केजरीवाल पर हमले में रहा व्यस्त  
3. लोकसभा चुनाव के बाद राज्यों में मिली जीत से अति आत्मविश्वास में आ गई थी भाजपा
4. आदित्यनाथ और साक्षी महाराज के विवादित बयानों से मध्यवर्ग हुआ नाराज
5- गलती के लिए माफी मांगकर केजरीवाल ने भगोड़ा होने के लेबल को हटाया

4. भाजपा का वोट प्रतिशत ज्यादा नहीं गिरा

10 Key take aways of Delhi Elections 2015

भले ही विधानसभा चुनाव में सीटें जीतने के मामले में भाजपा की हालत लगभग कांग्रेस जैसी ही हो गई है, लेकिन करीब 32.2 फीसदी मतों के साथ उसे वोटर खिसकने का बड़ा नुकसान नहीं हुआ है।

वर्ष 2013 के चुनाव में उसे 33.07 फीसदी मत मिले थे।

ऐसे में जाहिर है कि आप ने कांग्रेस के वोट बैंक पर कब्जा जमाया है। आप को करीब 54.3 फीसदी मत मिले हैं। कांग्रेस को करीब 9.7 फीसदी मत से संतोष करना पड़ा।

5. 14 को छोड़ा था सीएम पद, 14 को ही लेंगे शपथ

10 Key take aways of Delhi Elections 2015

आप नेता अरविंद केजरीवाल 14 फरवरी को रामलीला मैदान में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। पार्टी नेता आशुतोष ने कहा कि प्रचंड बहुमत मिलने के बाद अब जनता के बीच पहले की तरह ही आप की सरकार शपथ लेगी।

दूसरी ओर, अन्ना ने इस बार केजरीवाल से मेट्रो का सफर करके शपथ लेने नहीं जाने की अपील की है।

गौरतलब है कि वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने जनलोकपाल बिल के मुद्दे पर 14 फरवरी को ही सरकार छोड़ी थी।

6. छह महिलाएं चुनी गईं

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दिल्ली विधानसभा के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब सभी महिला विधायक सत्ता पक्ष की बेंच पर बैठेंगी। पार्टी ने छह ही महिलाओं को टिकट दिया था।

राखी बिडलान, अलका  लांबा, भावना गौड़, वंदना कुमारी, प्रमिला टोकस और सरिता सिंह ने दिग्गज नेताओं को पटखनी देकर जीत हासिल की है।

7. दिल्ली की सबसे जवान विधानसभा
विधानसभा की दहलीज लांघने वाले 70 विधायकों में से आप पार्टी के 29 विधायक 26 से 40 आयु वर्ग के हैं।

निर्वाचित विधायकों की उम्र के लिहाज दिल्ली सबसे जवान विधानसभा के रूप में उभरी है। सबसे कम उम्र के विधायक बने हैं किराड़ी से ऋतुराज झा और देवली से प्रकाश। दोनों की उम्र महज 26 साल है।

8. पहली बार हारी भाजपा

10 Key take aways of Delhi Elections 2015

कृष्ण नगर सीट से केंद्रीय मंत्री डॉक्टर हर्षवर्द्धन पिछले सभी चुनाव जीतते आ रहे थे। इसे भाजपा का गढ़ माना जाता था, मगर पार्टी की पैराशूट प्रत्याशी किरण बेदी आप के एसके बग्गा के हाथों पराजित हो गईं।

9. सबसे ज्यादा
विकासपुरी - 77665 वोट से
विजेता : महेंद्र यादव (आप)
पराजित : संजय सिंह (भाजपा)
सबसे कम
नजफगढ़ - 1555 वोट से
विजेता : कैलाश गहलोत (आप)
पराजित : भरत सिंह (इंडियन नेशनल लोक दल)

10. कांग्रेस मुक्त हुई दिल्ली विधानसभा

10 Key take aways of Delhi Elections 2015

पहली बार दिल्ली विधानसभा कांग्रेस मुक्त हो गई है। आजादी के बाद यह पहला मौका है जब किसी विधानसभा में कांग्रेस का एक भी सदस्य चुनकर नहीं आया। इतना ही नहीं 70 में से 64 प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा सके। 33 प्रत्याशी 10 हजार का आंकड़ा भी नहीं छू सके।

कांग्रेसियों की जमानत जब्त
कांग्रेस के 70 में से 64 प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा सके। जमानत जब्त कराने वालों में कंपेन कमेटी के अध्यक्ष अजय माकन, पूर्व सांसद महाबल मिश्रा, पूर्व मंत्री प्रो. किरण वालिया, हारून यूसुफ, डॉ. नरेंद्रनाथ, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. योगानंद शास्त्री, चौधरी प्रेम सिंह, सुभाष चोपड़ा केनाम शामिल हैं।

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