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मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे परोसेंगे अब मिडडे मील

Wed, 23 Jul 2014 07:51 PM IST
धीरज कनोजिया/अमर उजाला, नई दिल्ली
धीरज कनोजिया/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 23 Jul 2014 07:51 PM IST
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Temple, mosque, gurdwara serve Midday meal now

स्कूली बच्चों की दोपहर के भोजन की थाली को पोषक और स्वच्छ बनाने के मकसद से मोदी सरकार अब इस काम में मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारों जैसे धार्मिक संस्थानों को जोड़ने की तैयारी में है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने मानव संसाधन मंत्रालय ने स्कूलों में दोपहर के भोजन देने की मिड डे मील योजना को बेहतर बनाने की दिशा में सामाजिक और धार्मिक संस्थानों की मदद लेने का प्रस्ताव रखा है।
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यूपीए सरकार के समय ये योजना बहुत विवादों में रही है। वर्ष 2013 में बिहार के छपरा में तो दोपहर के भोजन की थाली में 22 स्कूली बच्चों को मौत परोस दी गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने प्रस्ताव

Temple, mosque, gurdwara serve Midday meal now

बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत देशभर के राज्यों में मिड डे मील में लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामले सामने आते रहे हैं। अब मोदी सरकार इस योजना को सफल बनाने के लिए कुछ नए विचारों को मूर्त रूप देने की योजना बना रही है।

मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि मंदिर और गुरुद्वारे अपने यहां बड़े स्तर पर लंगर और भंडारे के माध्यम से गरीबों को भोजन मुहैया कराते हैं। इनके भोजन की क्वालिटी और स्वच्छता काफी अच्छी होती है।

अगर इन संस्थानों को स्कूली बच्चों को भोजन देने में लगाया जाता है तो इस योजना को बेहद सफलता से लागू किया जा सकता है। मंत्रालय का मानना है कि ऐसा करके इस योजना में भ्रष्टाचार को भी कम किया जा सकता है।

धार्मिक संस्थानों को जोड़ने की योजना

Temple, mosque, gurdwara serve Midday meal now

प्रधानमंत्री के सामने पेश बिंदु में मंत्रालय ने इस योजना में समाज की भागदारी को बढ़ावा देने की जोरदार वकालत की है। मंत्रालय ने प्रधानमंत्री को कहा है कि इसके लिए अक्षय पात्र और तिथि भोजन जैसी सामाजिक पहल का अध्ययन करके आगे बढ़ने की योजना बनाई गई है।

सामाजिक और धार्मिक संस्थानों को इस योजना में जोड़ने के साथ रेलवे जैसे सरकारी संस्थानों के लिए भी बच्चों के भोजन की आपूर्ति करने का लक्ष्य रखा गया है।

मंत्रालय का कहना है कि बच्चों को खाने की आपूर्ति में अगर धार्मिक संस्थानों को जोड़ा जाता है तो ये एक बेहतर प्रयोग साबित हो सकता है। साथ ही मिड डे मील के भोजन की थाली के व्यंजनों को बदलने की वकालत की गई है। ताकि इसको लेकर बच्चों की रुचि बढ़ाई जाए।

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