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संसदीय इतिहास से एक दिन गायब होने के मायने

Wed, 19 Feb 2014 05:03 PM IST
प्रमोद जोशी/वरिष्ठ पत्रकार
प्रमोद जोशी/वरिष्ठ पत्रकार Updated Wed, 19 Feb 2014 05:03 PM IST
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telangana issue parliament uproar

तेलंगाना मुद्दे पर लोकसभा में हुई बहस को देखने सुनने का जनता को पूरा अधिकार था। ये भारतीय लोकतंत्र का दुर्भाग्य है कि जिस उद्देश्य से लोकसभा का चैनल शुरू किया गया था उसका एक अहम दिन भारतीय जनता ने गंवा दिया।

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इसमें कोई दो राय नहीं है कि चैनल पर लोकसभा की कार्यवाही के प्रसारण को जानबूझकर बंद किया गया होगा। हालांकि सरकार ने स्पष्टीकरण दिया है कि तकनीकी कारणों से ऐसा हुआ है। मान लीजिए कि यह सहमति बन गई थी कि इस प्रसारण से आंध्र प्रदेश में क़ानून व्यवस्था की स्थिति खराब होती तो फिर इसके लिए स्पष्टीकरण की ज़रूरत नहीं थी।
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हालांकि आंध्र में आप जो देख रहे हैं उससे ख़राब स्थिति और क्या हो सकती थी। राज्य के मुख्यमंत्री इस्तीफ़ा दे चुके हैं और एक बड़े इलाके में विरोध और बंद हो रहे हैं।

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सियासी दलों की नासमझी

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इसलिए लोकसभा टीवी का प्रसारण न होना एक नासमझी का फ़ैसला था। इससे एक और बात साबित होती है कि अभी देश के व्यवस्थापकों में लोकतंत्र की पारदर्शिता की समझ बहुत पिछड़े स्तर की है। वो समझदार नहीं हैं।

जबसे संसद की कार्यवाही का सीधा प्रसारण शुरू हुआ है तबसे शायद यह पहला मामला है जब लोकसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण बंद किया गया है।

आपातकाल के दौरान संसद की कार्यवाही को सेंसर करके छापा गया और शुरुआत में विपक्षी नेताओं के भाषणों को काट छांटकर प्रकाशित किया गया। वो तो भारत के संसदीय जीवन का काला अध्याय है लेकिन इस समय तो हम बहुत अच्छी स्थिति में हैं।

भाजपा का रहा सहयोग

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मुझे नहीं लगता कि प्रमुख विपक्षी दल भाजपा इस मामले से अनभिज्ञ होगी। भाजपा से तो बहुत अच्छे तरीक़े से बात की गई होगी।

इससे पहले भी संसद में अहम मसलों पर यूपीए का भाजपा के साथ सहयोग रहा है। तेलंगाना के मुद्दे पर भी क्लिक करें भाजपा को विश्वास में लिया गया था भले ही पार्टी राजनीतिक कारणों से कुछ भी कहे।

तेलंगाना का मुद्दा राजनीतिक कारणों से ही लटका हुआ है अन्यथा इसे तो 1956 में ही बन जाना चाहिए था जब राज्यों के पुनर्गठन का काम किया जा रहा था।

साल 2004 में यूपीए ने अलग तेलंगाना बनाने का आश्वासन दिया था और अगर उसी समय इसे बना लिया गया होता तो आज हैदराबाद की जगह एक नई राजधानी बन चुकी होती, जो भी गर्दो गुबार था वो साफ़ हो चुका होता।

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