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41 साल बाद आंध्र प्रदेश में लगेगा राष्ट्रपति शासन!

Sat, 01 Mar 2014 01:00 AM IST
Updated Sat, 01 Mar 2014 01:00 AM IST
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telangana fallout: ap under president's rule after 41 years

केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने और राज्य की विधानसभा को निलंबित रखने का फैसला किया है।

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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन किरण कुमार रेड्डी ने संसद की ओर से तेलंगाना विधेयक को पारित कराने का विरोध जताते हुए गत 19 फरवरी को मुख्यमंत्री पद और कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

केंद्र सरकार ने मौजूदा हालात को देखकर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना ही ठीक समझा। आंध्र प्रदेश के राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हा राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्य का प्रभार संभालेंगे।

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लोकसभा के साथ ही होंगे विधानसभा चुनाव

telangana fallout: ap under president's rule after 41 years

राज्य के राजनीतिक हालात और अनुच्छेद 356 (1) के मुद्दे पर विचार करने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रदेश में राष्ट्रपति लगाने की सिफारिश करने का फैसला किया है। प्रदेश की 294 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल दो जून 2014 को खत्म होगा।

इससे पहले विधानसभा चुनाव कराने होंगे। चुनाव आयोग आने वाले कुछ दिनों में लोकसभा चुनाव का ऐलान कर सकता है। ऐसे में लोकसभा चुनाव के साथ ही प्रदेश के विधानसभा चुनाव का ऐलान होने की बात है।

आंध्र प्रदेश का बंटवारा कर अलग तेलंगाना के रूप में देश के 29वें राज्य के गठन के मकसद से लाए गए विधेयक को संसद ने हाल ही में खत्म शीतकालीन सत्र में पारित किया है।

हालत सुधारने को खेला अलग तेलंगाना का दांव

telangana fallout: ap under president's rule after 41 years

आंध्र प्रदेश में दस साल से कांग्रेस की सरकार है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस रेड्डी की हेलीकाप्टर दुघर्टना में मौत के बाद प्रदेश में कांग्रेस का सियासी ग्राफ नीचे आया है।

रेड्डी के बेटे जगन रेड्डी ने भी कांग्रेस से अलग होकर अपनी अलग पार्टी वाईएसआर कांग्रेस बना ली है। वह लगातार कांग्रेस को चुनौती दे रहे हैं।

प्रदेश में अपनी राजनीतिक हालत सुधारने के लिए कांग्रेस ने अलग तेलंगाना राज्य का दांव खेला था। मगर इसके खिलाफ उसके मुख्यमंत्री ही नहीं कई कैबिनेट मंत्री खिलाफ हो गए। प्रधानमंत्री निवास पर हुई मंत्रिमंडल की बैठक में आंध्र प्रदेश राज्य विधानसभा को अस्थायी तौर पर भंग करने का फैसला भी किया गया है।

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राज्य में 41 साल बाद लगा राष्ट्रपति शासन

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यह दूसरा मौका है, जब आंध्र प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाया गया है। इससे पहले जनवरी, 1973 में राज्य में अलग राज्य की मांग करते हुए ‘जय आंध्र’ प्रदर्शन के चलते राष्ट्रपति शासन लगाया गया था।

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने उस समय मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद राज्य में 10 महीने से ज्यादा तक राष्ट्रपति शासन रहा था।

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