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राज्यसभा में भी तेलंगाना बिल पास

Fri, 21 Feb 2014 07:38 AM IST
Updated Fri, 21 Feb 2014 07:38 AM IST
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Telangana bill pass in upper house of parliament

भारी शोरशराबे और दस से भी ज्यादा स्थगन के बावजूद सरकार बृहस्पतिवार को राज्यसभा में तेलंगाना बिल पास कराने में कामयाब रही। लोकसभा के बाद राज्यसभा से बिल पारित होने के साथ ही अब तेलंगाना के रूप में देश के 29वें राज्य के बनने का रास्ता साफ हो गया है।

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बिल पर समर्थन हासिल करने के लिए भाजपा से किए वादे के मुताबिक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सीमांध्र के लिए विशेष पैकेज के साथ उसे पांच साल के लिए विशेष राज्य का दर्जा देने की घोषणा की है।
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प्रधानमंत्री ने कहा कि हैदराबाद दस साल तक दोनों राज्यों की राजधानी रहेगा।

जमकर हुआ व‌िरोध

Telangana bill pass in upper house of parliament

सुबह से ही टीडीपी और सपा के साथ पृथक तेलंगाना का विरोध कर रहे तृणमूल कांग्रेस के सांसद प्रधानमंत्री के वक्तव्य के दौरान बिल की कॉपी फाड़कर हवा में लहराते रहे।

इस हंगामे की वजह से प्रधानमंत्री को एक तरह से सांसदों के सुरक्षा घेरे में सीमांध्र के लिए पैकेज की घोषणा करनी पड़ी।

दिन भर की मशक्कत और पर्दे के पीछे हुई कई बैठकों के बाद करीब शाम चार बजे बिल पर बहस शुरू हो पाई। इसके साथ ही संशोधनों के साथ बिल के समर्थन का भरोसा दे चुकी भाजपा ने कांग्रेस को तेलंगाना मुद्दे को बदतर हालात में पहुंचाने का जिम्मेदार ठहरा दिया।

राज्य के साथ लोगों को भी बांट द‌िया

Telangana bill pass in upper house of parliament

विपक्ष ने कहा कि कांग्रेस ने कुछ सीटों के फायदे के लिए राज्य बांटने के बजाय लोगों को ही बांट दिया। उधर, केंद्रीय मंत्री चिरंजीवी ने अपनी ही पार्टी और सरकार के फैसले के खिलाफ लंबा बयान दिया। यह सदन में आंध्र से सांसद चिरंजीवी का पहला भाषण था।

लिहाजा परंपरा के मुताबिक सुबह से जोरदार हंगामा कर रहे विरोधी सांसद उनके बयान के दौरान शांत बैठ गए। चिरंजीवी ने तेलंगाना मुद्दे को खराब शक्ल देने के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वह बड़े भारी मन से अपने पार्टी के विरोध में बोल रहे हैं।

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अरुण जेटली ने बोला हमला

Telangana bill pass in upper house of parliament

भारी शोरशराबे के बीच अरुण जेटली ने कहा कि सीमांध्र के भविष्य को सुनिश्चित किए बिना इस बिल को पास करना वहां के लोगों के साथ अन्याय होगा। यही वजह है कि भाजपा संशोधनों के साथ ही इस बिल के समर्थन पर राजी हुई है।

बुधवार से ही चल रहे विचार विमर्श के बाद सरकार और भाजपा ने बीच का रास्ता निकाला। आने वाले चुनाव में पृथक राज्यों के वोट बैंकों पर नजर गड़ाए दोनों दल सीमांध्र को विशेष पैकेज दिए जाने पर राजी हुए।

6 नई घोषणाएं भी हुईं

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इसी सुलह के आधार पर प्रधानमंत्री ने छह नई घोषणाएं कीं। हैदराबाद को दस साल के लिए राजधानी रखने और सीमांध्र को पांच साल तक के लिए विशेष राज्य का दर्जा देने के साथ मनमोहन सिंह ने रायलसीमा और सीमांध्र के आर्थिक और औद्योगिक उत्थान के लिए कर में विशेष छूट देने की भी घोषणा की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सीमांध्र और उत्तरी तटीय आंध्र के पिछड़े इलाके को बुंदेलखंड और ओडिशा के कोरापुट-बोलनगीर-कालाहांडी को दिए विशेष पैकेज की तर्ज पर ही मदद दिए जाने का फैसला किया गया है।

मनमोहन के मुताबिक पृथक राज्यों के उत्थान के लिए जब भी जरूरत पड़ेगी बिल में संशोधन लाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद सिर्फ तेलंगाना का गठन नहीं बल्कि सीमांध्र और पिछड़े इलाकों की प्रगति भी है।
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