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26 घंटे की खींचतान के बाद बनी 'टीम मोदी'
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jul 2013 07:19 PM IST
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आखिरकार टीम मोदी का गठन हो ही गया। हालांकि इसके लिए विभिन्न मुद्दों पर 26 घंटे से भी अधिक समय तक खींचतान चली।
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खासतौर पर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की जोनल प्रभारी बनाने की हसरत अधूरी ही रही।
पूरा चुनाव कहीं सांप्रदायिकता बनाम धर्मनिरपेक्षता न हो जाए, इसके लिए गुजरात के विकास मॉडल की जगह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विकास मॉडल को पेश करने की सहमति बनी।
दो दिनों तक चली मैराथन बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष की जगह चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष बनाए गए मोदी को रिपोर्ट करने पर भी सवाल खड़े किए। मगर अंत में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और संगठन महासचिव रामलाल ने माथापच्ची कर शुक्रवार देर शाम टीम मोदी की घोषणा करने में सफलता हासिल कर ली।
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दरअसल शुक्रवार को घोषित हुई 20 समितियों वाली टीम मोदी की घोषणा बीते बृहस्पतिवार को ही की जानी थी। मगर बैठक में मोदी के कई प्रस्तावों पर वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी कैंप के नेताओं के अगर मगर ने टीम घोषित होने की राह में रोड़े डाल दिए।
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हालांकि शुक्रवार को टीम घोषित कर दी गई, मगर इसके लिए मोदी के कई प्रस्तावों को बदलना पड़ गया। खासतौर पर मोदी चाहते थे कि देश भर में चार जोनल प्रभारी बना कर इसका जिम्मा वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, वेंकैया नायडू और नितिन गडकरी को दिया जाए।
मगर सूत्र बताते हैं कि इनमें से तीन नेताओं ने राज्य प्रभारियों की व्यवस्था मौजूद हो जाने के बावजूद जोनल प्रभारी व्यवस्था लागू करने का विरोध किया। सूत्र बताते हैं कि बैठक में एक वरिष्ठ नेता ने पार्टी अध्यक्ष की जगह चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष को रिपोर्ट करने की परंपरा को पार्टी के संविधान के खिलाफ बताया।
इसके अलावा एक इसी कैंप के नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान विकास का गुजरात मॉडल पेश करने पर आपत्ति जताई। इनका कहना था कि इससे पहले से ही मोदी के बहाने पूरे चुनाव को सांप्रदायिकता बनाम धर्मनिरपेक्षता का रंग देने की कोशिश में जुटी कांग्रेस की राह आसान हो जाएगी।
यही कारण है कि बाद में गुजरात मॉडल की जगह वाजपेयी मॉडल को पेश करने पर सहमति बनी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि बृहस्पतिवार की बैठक में विवाद के गहरा जाने के बाद टीम मोदी गठित करने के लिए राजनाथ ने रामलाल के साथ माथापच्ची की। इस दौरान कई नेताओं से बातचीत के बाद मोदी के कई प्रस्तावों को बदला गया।