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नीरज और इरफान हबीब ने अपने गुरु को किया याद

Fri, 05 Sep 2014 06:59 PM IST
दीपक शर्मा/अमर उजाला, अलीगढ़
दीपक शर्मा/अमर उजाला, अलीगढ़ Updated Fri, 05 Sep 2014 06:59 PM IST
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teachers day special talk with neeraj and habib.

हे गुरु हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। असत्य से सत्य की ओर ले चलो। ऐसी ही कामना के साथ गुरु का मार्गदर्शन जीवन के हर मोड़ पर पथ प्रशस्त करता है। व्यक्ति जीवन में सफलता की बुलंदियों पर पहुंच कर भी अपने गुरु की भूमिका को याद रखता है।

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प्रख्यात गीतकार पद्म भूषण गोपाल दास 'नीरज' और ख्याति प्राप्त इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने अपने छात्र जीवन में गुरु की भूमिका को अभी भी याद करते हैं। दोनों दिग्गजों का मानना है कि अगर उस समय उन्हें अपने गुरुओं का मार्गदर्शन नहीं मिला होता तो जीवन की दिशा और दशा कुछ और होती।
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गीतकार नीरज को मिला गुरु का आशीर्वाद
नीरज कहते हैं कि जब वह माध्यमिक स्कूल में पढ़ते थे तो एक बार परीक्षा के समय सहपाठियों की कॉपी आदि में देखने का प्रयास कर रहे थे। तब उनके शिक्षक माहेश्वरी जी पास आए और बोले बेटा गोपाल दास ऐसा करने से कोई लाभ नहीं होगा। स्वयं में वह क्षमता पैदा करो कि दूसरों की ओर देखने की आवश्यकता ही न पड़े।
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जीवन में जो भी क्षेत्र चुनना उसमें अव्वल ही बनने का प्रयास करना और वही लक्ष्य भी रखना। जीवन में हमेशा यह बाद मुझे स्मरण रही। मैं भी धर्म समाज कॉलेज में शिक्षक रहा और मैंने छात्रों से हमेशा इस संस्मरण को साझा किया। लेकिन आज मैं देखता हूं कि व्यक्ति सिर्फ साक्षर हो रहा है शिक्षित नहीं। क्योंकि शिक्षा का ताल्लुक मूल्यों से है जिनमें गिरावट आई है।

इरफान हबीब को प्रेरित किया टोंकी साहब ने
प्रो. इरफान हबीब कहते हैं कि मैं एएमयू के एसटीएस हाईस्कूल में पढ़ता था। कक्षा 8 की बात है। मुझे मेरे टीचर टोंकी साहब इतिहास पढ़ते थे। उनके पास सम्राट अशोक से संबंधित एक बहुत पुरानी किताब थी। चूंकि लिपि का अस्तित्व अशोक से समय से ही मिलता है। उस किताब में अशोक और लिपि के उदय और विस्तार का बेहद शानदार विवरण था।


मैंने वह किताब उनसे लेकर पढ़ी। साथ ही टोंकी साहब ने भी अशोक का वह विवरण मेरे समक्ष रखा कि अशोक का किरदार मेरे लिए जिज्ञासा का विषय बना। यह बात मुझे अभी तक याद है। मैं शिक्षक दिवस के मौके पर टोंकी साहब को श्रृद्धासुमन अर्पित करता हूं।

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