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'मास्टरजी' नरेंद्र मोदी ने बच्चों को सुनाई एक कहानी, आप भी पढ़ें

Fri, 04 Sep 2015 04:10 PM IST
Updated Fri, 04 Sep 2015 04:10 PM IST
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Teacher's day interaction session Modi tells a Story

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षक दिवस के एक दिन पूर्व देशभर के स्कूली बच्चों से बात की। दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने शिक्षक-छात्र के संबंध और उनके महत्व के बारे में बच्चों को बताया।

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इस दौरान उन्होंने एक ऐसी महिला का भी जिक्र किया जिसने बच्चों को कुछ अलग तरह की शिक्षा दी। मोदी ने अपने भाषण के दौरान एक शिक्षक की महत्ता को समझाने के लिए आंगनवाड़ी में काम करने वाली एक महिला का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पांचवीं कक्षा पास आंगनवाड़ी में काम करने वाली एक महिला कैसे बच्चों के जीवन में अहम परिवर्तन ला सकती है।
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उन्होंने महिला की कहानी को आगे बढ़ाते हुए कहा जैसा की सब जानते हैं गांव में आंगनवाड़ी का कार्यक्रम चलाया जाता है जहां गांव के गरीब बच्चे पढ़ने और कुछ सीखने के लिए आते हैं। यहां पर उन्हें कई तरह की शिक्षा दी जाती है। लेकिन इस महिला ने कुछ अलग तरह की ही शिक्षा अपने बच्चों को देनी शुरु की।

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साड़ी फाड़कर दी शिक्षा

Teacher's day interaction session Modi tells a Story

उन्होंने बताया कि जब गांव की गरीब महिलाओं की साड़ियां पुरानी हो जाती हैं तो वह उसे जितना लंबा हो सके चलाने की कोशिश करती हैं और बाद में सोचती हैं कि जब बर्तन बेचने वाला आएगा तो इसके बदले कुछ नए बर्तन खरीद लेंगी। लेकिन इस महिला ने ऐसा नहीं किया।

उसने अपनी साड़ी को कई टुकड़ों में फाड़ दिया और अपने हाथ से उसकी कढ़ाई करके उससे कई रूमाल बनाए। फिर उसने अपने पैसे से बाजार से सेफ्टी पिन खरीदे और उसके आंगनबाड़ी में जो बीस बाइस बच्चे आते थे उनके सबके जेब के पास उन रूमाल को सेफ्टी पिन के जरिए लगा देती थी।

इसके बाद वह बच्चों को समझाती थी कि कैसे इस इस रूमाल का इस्तेमाल करना है। कैसे हाथ पोंछना है, कैसे मुंह पोंछना है ये सभी बातें उन्हें समझाती थी।

आंगनवाड़ी कार्यकत्री की कहानी

Teacher's day interaction session Modi tells a Story

शाम को जब बच्चे अपने घर जाने लगते थे तो उन सभी रूमालों को वो निकाल लेती थी और घर जाकर उन्हें धोकर अगले दिन फिर बच्चों के लिए लेकर आती थी।

प्रधानमंत्री ने उन महिला शिक्षक की तारीफ करते हुए कहा कि एक शिक्षक अपने बच्चों के जीवन को कैसे नए मूल्यों के संवारता है यह उससे सीखने की जरुरत है। ऐसे कई शिक्षक हैं जो अलग-अलग तरीकों से अपने छात्रों को जीवन के कई अहल मूल्य सिखाते हैं।

उन्होंने कहा कि जैसे एक कुम्हार एक हाथ से अपने घड़े को संभालता है और दूसरे हाथ से उसे संवारता कुछ इसी तरह एक शिक्षक भी अपने बच्चों को संवारने की कोशिश करता है और उनके जीवन में अहम बदलाव लाता है। यह एक शिक्षक का अपने छात्रों के प्रति लगाव ही होता है।

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