मोदी सरकार को महंगा पड़ेगा PF पर 'टैक्स' काटना
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकार द्वारा सर्विस टैक्स में करीब दो फीसदी की बढ़ोतरी के फैसले के बाद कर्मचारियों के प्री मेच्योर भविष्य निधि (पीएफ) को टीडीएस (स्त्रोत पर कर कटौती) के दायरे में लाने के फैसले पर देश के श्रमिक संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। इस फैसले की कांग्रेसी, वामपंथी एवं अन्य श्रमिक संगठनों ने ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े भारतीय मजदूर संघ ने भी तीव्र आलोचना करते हुए कहा है कि वह श्रम मंत्रालय को इस फैसले को वापस लेने के लिए पत्र लिखेगा।
इधर, आईटी उद्योग एवं अन्य क्षेत्र में काम करने वाले लोगों ने भी इसके खिलाफ आवाज उठाना शुरू कर दिया है। पांच करोड़ से भी ज्यादा लाभार्थियों की निधि का प्रबंधन करने वाले कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने बृहस्पतिवार को एक अधिसूचना जारी की थी।
इसके मुताबिक आगामी एक जून से पांच साल से कम समय के लिए काम करने वाले कर्मचारी यदि अपना पीएफ निकालते हैं और पीएफ की राशि 30,000 रुपये से ज्यादा होती है तो उस पर नियमानुसार दस फीसदी का टीडीएस काटा जाएगा।
विरोध के बावजूद लिया निर्णय
भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के अध्यक्ष वैद्यनाथ राय ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में सरकार के इस फैसले को श्रमिक विरोधी कदम बताया। उनके मुताबिक बीएमएस इस मसले पर शनिवार को ही श्रम मंत्रालय को पत्र लिखने वाला है और मंत्रालय से कहा जाएगा कि इस श्रमिक विरोधी फैसले को वापस ले।
उनके मुताबिक बीएमस के ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड आफ ट्रस्टी में तीन सदस्य हैं और तीनों ने इस फैसले का विरोध किया है, तब भी यह निर्णय ले लिया गया है।
कांग्रेस से जुड़े श्रमिक संगठन इंटक के सचिव डी एल सचदेव का कहना है कि उनका संगठन सरकार के इस फैसले का विरोध करेगा। उसने इस मसले पर श्रम मंत्रालय को एक चिट्ठी लिखने का फैसला किया है।
वामपंथी संगठन सीटू के अध्यक्ष ए के पद्मनाभन के मुताबिक सरकार एक तरफ तो निवेशकों और उद्योगपतियों को काफी सहूलियत दे रही है, दूसरी तरफ श्रमिकों पर कर का बोझ लादती जा रही है। पीएफ से पैसे निकालने पर टीडीएस काटना मजदूरों के प्रति अन्याय है। हिन्द मजदूर सभा के सचिव ए डी नागपाल ने भी इस फैसले का विरोध किया है।
आईटी इंडस्ट्री में काम करने वालो ने किया विरोध
आईटी उद्योग में काम करने वालों ने भी सरकार के इस फैसले का तीव्र विरोध किया है। बहुराष्ट्रीय कंपनी कागनिजेंट के सॉफ्टवेयर इंजीनियर सुनील कुमार तिवारी का कहना है कि आईटी फील्ड में तो औसतन कर्मचारी एक कंपनी में तीन-चार साल ही नौकरी करता है।
ये लोग हर बार कंपनी बदलने पर पीएफ का पैसा निकलवा लेते हैं। सरकार के इस फैसले का मतलब है कि कर्मचारी नौकरी बदलने पर हर बार पीएफ से 10 फीसदी टैक्स कटवाए।
एक निजी कंपनी में काम करने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर जयद्रथ सिंह का कहना है कि उनके फील्ड में भी तीन-चार साल में लोग नौकरी बदल लेते हैं। उनका पैकेज इतना तो होता ही है कि पीएफ की राशि 30000 रुपये से तो ज्यादा बने। मतलब यह है कि जब भी नौकरी बदलें तो सोच-समझ कर बदलें क्योंकि सरकार टैक्स काटने के लिए तैयार बैठी है।
कब नहीं कटेगा टीडीएस
*राष्ट्रीय पेंशन स्कीम जैसी योजना में फंड ट्रांसफर पर
*एक खाते से दूसरे खाते में फीएफ के ट्रांसफर पर
*बीमारी की वजह से नौकरी से हटाए जाने पर
*सदस्य द्वारा फार्म 15 जी या फार्म 15एच जमा करने पर
*18 लाख कर्मचारी 1-5 साल के भीतर पीएफ से निकाल लेते हैं पैसे
*ईपीएफओ में 8 करोड़ खातों के 27000 करोड़ रु. का नहीं कोई दावेदार
*2.5 अकाउंट में सिर्फ एक बार हुआ अंशदान
*वित्त वर्ष 2013-14 तक निष्क्रिय खातों से ईपीएफओ के पास कुल 26,496 करोड़ रुपये जमा थे। वर्ष 2011 से सरकार ने ऐसे निष्क्त्रिस्य खातों पर ब्याज देना बंद कर दिया है, जिनमें पिछले 36 महीने से कोई अंशदान नहीं हुआ है।