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आपके पास भी है LIC पॉलिसी, जरूर पढ़िए ये 'बुरी खबर'

Wed, 04 Feb 2015 05:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 04 Feb 2015 05:59 PM IST
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tds cut from old lic policy.

भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की वर्ष 2014 से पहले जारी पॉलिसी की परिपक्वता के समय 2 फीसदी के स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) की वजह से लाखों पॉलिसीधारक सकते में हैं। सकते की वजह यह है कि टीडीएस काटने संबंधी फैसला 2014 में हुआ और इसे पिछली अवधि से लागू किया जा रहा है।

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ग्राहकों का कहना है कि जब उन्होंने पॉलिसी ली थी, उस समय इस तरह का न तो कोई प्रावधान था और न ही ऐसी जानकारी दी गई थी। अब इसे पिछली अवधि से क्यों लागू किया जा रहा है।
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भारतीय जीवन बीमा निगम के विपणन विभाग से जुड़े एक व्यक्ति के मुताबिक वर्ष 2014 के वित्त विधेयक में एक प्रावधान किया गया था कि जिन पॉलिसियों में प्रीमियम का दस गुना ज्यादा बीमा कवरेज नहीं होगा, उसमें कर में छूट का लाभ नहीं मिलेगा और उसमें 2 फीसदी टीडीएस काटा जाएगा। हालांकि यह प्रावधान 1 नवंबर 2014 से लागू हुआ है, लेकिन इससे पहले जारी पालिसियों में भी 2 फीसदी का टीडीएस काटा जा रहा है।
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एजेंटों से हो रही पॉलिसीधारकों की झड़प

tds cut from old lic policy.

भारतीय जीवन बीमा निगम के विपणन विभाग से जुड़े व्यक्ति ने बताया कि पहले जो बीमा पॉलिसियां जारी हुईं, उनमें अधिकतर में देय प्रीमियम से 10 गुना ज्यादा राशि का जीवन बीमा नहीं था। वर्ष 2014 के वित्त विधेयक में इस बात का प्रावधान किया गया था। बस इसी प्रावधान से दिक्कत शुरू हो गई।

उन्होंने बताया कि पहले की जिन पॉलिसियों में प्रीमियम का 10 गुना ज्यादा बीमा कवरेज है, उसमें तो कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन जिन पॉलिसियों में इतने का कवरेज नहीं है, उसमें 2 फीसदी टीडीएस काटा जा रहा है। देखा जाए तो वर्ष 2003 के बाद जारी अधिकतर पॉलिसियों में प्रीमियम रकम के 10 गुना राशि का बीमा कवरेज नहीं है। इसलिए उसकी परिपक्वता पर टीडीएस कट रहा है। इस वजह से आए दिन पॉलिसीधारक की एजेंटों से बहस हो रही है।

पॉलिसीधारक कहते हैं कि पॉलिसी बेचते वक्त तो यह बताया नहीं गया था। अब क्यों टीडीएस काटा जा रहा है। उन्होंने स्वीकार किया कि इस चक्कर में आए दिन एलआईसी की शाखाओं में ग्राहकों ,एजेंटों और कर्मचारियों के बीच झड़प हो जाती है। उन्हें किसी तरह से संभाला जाता है। एलआईसी के एक एजेंट के मुताबिक सरकार के इस प्रावधान की वजह से उनके ग्राहक बिदक रहे हैं, क्योंकि इससे लाखों पॉलिसीधारकों के हित प्रभावित हो रहे हैं।

उन्होंने बताया कि जिन ग्राहकों ने मनी बैक पॉलिसी ले रखी है, और उनका मनी बैक एक लाख रुपये से ज्यादा का आ रहा है, उनसे भी 2 फीसदी टीडीएस काटा जा रहा है।

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