भाजपा की वजह से चंद्रबाबू की पार्टी में बगावत!
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आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) और भाजपा का गठबंधन गहरे संकट में फंस गया है। इसका कारण टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू के खिलाफ उनकी अपनी ही पार्टी में आंतरिक विद्रोह होना है।
यह विद्रोह सीमांध्र में पार्टी की कुछ मजबूत सीटों को भाजपा को दिए जाने के कारण है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने बुधवार रात टेलीकांफ्रेंस कर भाजपा के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन तोड़ने का सुझाव चंद्रबाबू नायडू को दिया।
उन्होंने नायडू से कहा कि टीडीपी को सीमांध्र की सभी 175 विधानसभा सीटों और 25 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए और नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री बनने का समर्थन चुनाव बाद करना चाहिए।
पुरंदेश्वरी की उम्मीदवारी को लेकर आया था बयान!
राजामुंदरी ग्रामीण, नारसरावपेट और इच्छापुरम जैसे टीडीपी के मजबूत पकड़ वाले विधानसभा क्षेत्र भाजपा को दिए जाने का तीखा विरोध हो रहा है।
टीडीपी के लोकसभा प्रत्याशियों को डर है कि कहीं उनके क्षेत्र की विधानसभा सीट पर भाजपा के कमजोर उम्मीदवार की मौजूदगी से उनकी जीत की संभावना प्रभावित न हो जाए।
भाजपा में भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। भाजपा एनटी रामाराव की बेटी और पूर्व केंद्रीय मंत्री डी पुरंदेश्वरी को आंध्र की राजमपेट सीट से चुनाव मैदान में उतारना चाहती है। पुरंदेश्वरी इस क्षेत्र के लिए नई हैं, 2009 का चुनाव वह विशाखापत्तनम सीट से जीती थीं।
मतभेदों को दूर करने के लिए मोदी से हुई बात
इसी तरह भाजपा ने नारसपुरम लोकसभा सीट से उद्योगपति जी गंगा राजू को उतारने का फैसला किया है, जबकि यहां से मजबूत उम्मीदवार रघुराम कृष्ण राजू हो सकते थे।
समझा जाता है भाजपा ने यह फैसले संघ के दबाव में लिए हैं। मतभेदों को दूर करने को लिए चंद्रबाबू नायडू ने नरेंद्र मोदी से बात की है।
पिछले हफ्ते ही दोनों पार्टियों के बीच चुनावी गठबंधन हुआ था। समझौते के तहत भाजपा को 5 लोकसभा और 15 विधानसभा सीटें मिली थीं। मतभेदों के चलते खतरे में आए गठबंधन को देखते हुए भाजपा नेता जावडेकर पुणे से हैदराबाद पहुंच गए हैं।
छोटे साले दे रहे सिर दर्द!
हालांकि चंद्रबाबू नायडू पार्टी के प्रचार अभियान में जुटे हैं। पुणे में जावडेकर ने पत्रकारों से कहा की टीडीपी से गठबंधन तोड़ने का सवाल ही नहीं उठता, वह एनडीए का प्रमुख सदस्य रहा है।
भाजपा के दूसरे वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू ने बंगलूरू में कहा कि कांग्रेस को सत्ता से दूर रखने के लिए पार्टी को टीडीपी जैसे दलों का समर्थन जरूरी है।
वहीं, टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू के लिए नया सिरदर्द उनके छोटे साले यानी एनटीआर के छोटे बेटे एन हरीकृष्ण ने पैदा कर दिया है।
टीडीपी नहीं, भाजपा उम्मीदवारों को समर्थन
हरीकृष्ण विधानसभा का टिकट चाहते थे, पर उन्हें टीडीपी का टिकट नहीं मिला। हालांकि अपने एक साले अभिनेता बालाकृष्णा को नायडू ने हिंदूपुर विधानसभा सीट से टिकट दे दिया। जिससे हरिकृष्ण की नाराजगी बढ़ गई है।
उधर अभिनेता पवन कल्याण ने भी सात लोकसभा सीटों पर अपनी पार्टी जन सेना के चुनाव लड़ने का संकेत देकर चंद्रबाबू नायडू का सिरदर्द और बढ़ा दिया है।
पवन कल्याण को मोदी समर्थक माना जाता है, वह इसका इजहार भी कर चुके हैं। इससे पहले पवन कल्याण कहते रहे हैं कि उनकी पार्टी चुनाव नहीं लड़ेगी, बल्कि चुनाव में भाजपा उम्मीदवारों का समर्थन करेगी।