2015 में साइंस के इन चार बड़े लक्ष्यों पर रहेगी भारत की नजर
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साल 2014 भारत के लिए विज्ञान के क्षेत्र में कई उपलब्धियां लेकर आया। विज्ञान मामलों के जानकार पल्लव बागला बता रहे हैं कि 2015 में किन बड़ी वैज्ञानिक गतिविधियों पर भारत की नजर रहेगी।
हिंदुस्तानी जीपीएस: उम्मीद है कि 2015 में हिंदुस्तान का अपना नैविगेशन सैटलाइट सिस्टम कारगर करने को तैयार हो जाएगा। यानी हमारे पास अपना खुद का जीपीएस सिस्टम होगा। फिलहाल हम अमरीकी जीपीएस पर निर्भर हैं, लेकिन उसे हमारी सुरक्षा एजेंसियां इस्तेमाल नहीं कर सकतीं।
अगर हमें अपनी मिसाइलों को सही जगह भेजना है और अपने दुश्मन पर अचूक वार करना है, तो उसके लिए हमें अपना ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम बनाना होगा। इसलिए भारत ने अपना स्थानीय नैविगेशन सैटलाइट सिस्टम बनाया है।
विशाल टेलिस्कोप: हिंदुस्तान ने 30 मीटर चौड़ाई वाले विशाल टेलिस्कोप को बनाने में दूसरे देशों के साथ साझेदारी की है। जब ये बन कर पूरा हो जाएगा, तो भारतीय वैज्ञानिकों की भूमिका एक बड़ी उपलब्धि होगी। तो इस पर 2015 में जरूर नजर बनी रहेगी।
भारतीय भागीदारी
सर्न में भारतीय भागीदारी : आने वाले समय में जीनिवा में स्थित सर्न प्रयोगशाला में लार्ज हाईड्रोन कोलाइडर के फिर से चालू होने की उम्मीद है। सर्न में वैज्ञानिक ब्रह्मांड के रहस्यों को खोजने में जुटे हैं और इसमें भारतीय वैज्ञानिकों बहुत बड़ी भागीदारी होगी।
फास्ट ब्रीडर रियेक्टर : 2015 में हमें ये भी उम्मीद करनी चाहिए कि भारत का अपना फास्ट ब्रीडर रियेक्टर ऑनलाइन हो जाए। ये प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रियेक्टर 500 मेगावॉट का बहुत बड़ा रियेक्टर है जो कि प्लूटोनियम से चलता है। पिछले दस सालों से उस पर काम चल रहा है, और जैसे ही ये पूरा होगा तो इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जाएगा। दुनिया में ऐसे बहुत कम देश हैं जो इसके लिए फास्ट ब्रीडर जैसी नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।