तापस की संसद सदस्यता रद्द करने की मांग तेज
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तृणमूल कांग्रेस के सांसद तापस पाल के विवादास्पद बयान का भले पूरे देश में विरोध हो रहा हो, लेकिन नदिया जिला प्रशासन इस मामले को लेकर जरा भी परेशान नहीं है।
उसने न तो 14 जून को जिले के चौमुहा गांव में पाल के विवादास्पद बयान का कोई संज्ञान लिया और न ही उसने केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से इस मामले में मांगी गई जानकारी के संदर्भ में अब तक कोई कार्रवाई की है।
नदिया के डीएम पीबी सलीम ने इस बारे में पूछने पर कहा कि वे फिलहाल अपने दफ्तर में नहीं हैं और इस घटना पर राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजेंगे। लेकिन डीएम कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार ने तापस पाल के मामले में अब तक जिला प्रशासन से कोई रिपोर्ट ही नहीं मांगी है।
केंद्र के निर्देश की अनदेखी कर रहा जिला प्रशासन
तृणमूल कांग्रेस ने अपनी ओर से इस मामले की लीपापोती में कोई कसर नहीं छोड़ी है। ममता ने यहां आयोजित एक सरकारी समारोह में कहा, "आजकल बढ़िया काम करने से लोगों का नाम नहीं होता। लेकिन छोटी-छोटी बातों को बेवजह तूल देकर सुनियोजित तरीके से विवाद पैदा कर दिया जाता है।"
इससे पहले बुधवार को यहां अपने सांसदों की बैठकों में उन्होंने सबसे भविष्य में कोई बयान देते समय सावधानी बरतने की सलाह दी थी। ममता ने जहां इस मामले को मीडिया की साजिश करार दिया है वहीं पार्टी के प्रवक्ता डेरेक ओ ब्रायन का कहना है कि पाल के माफीनामे के साथ ही यह मुद्दा खत्म हो गया है।
दूसरी ओर, विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं है। सीपीएम और भाजपा से जुड़े विभिन्न संगठन पाल की गिरफ्तारी और संसद सदस्यता रद्द करने की मांग को लेकर पूरे राज्य में धरना और प्रदर्शन कर रहे हैं।