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नैना साहनी हत्याकांडः सुशील को फांसी नहीं, उम्रकैद
अमर उजाला दिल्ली
Updated Tue, 08 Oct 2013 01:12 PM IST
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नैना साहनी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। मामले में दोषी सुशील शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने फांसी की सजा उम्रकैद में बदल दी।
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दिल्ली यूथ कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने 1995 में नैना साहनी हत्या मामले में खुद को मिली फांसी की सजा और दोषसिद्धि को सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी थी।
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कोर्ट ने मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' (दुर्लभतम) करार देते हुए कहा कि दोषी को अपनी अंतिम सांस तक जेल में रहना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोषी को पल-पल अपने अपराध का एहसास होना चाहिए, इसीलिए उसे जिंदगी भर जेल में रखा जाए।
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सुनवाई के दौरान शर्मा के वकील ने अपील की कि यह मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर कैटेगरी में नहीं आता है। अत: उनके मुवक्किल को मिली फांसी की सजा को रद्द किया जाए।
हालांकि, अभियोजन पक्ष ने शर्मा के वकील के तर्क का विरोध किया और कहा कि ट्रायल कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट ने फांसी की सजा को उचित ठहराया था।
यह मामला देशभर में तंदूर कांड के नाम से जाना जाता है। मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली बेंच जेल में बंद शर्मा की याचिका पर फैसला सुनाया। बेंच ने 13 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
विवाहेत्तर संबंधों के शक में सुशील शर्मा ने दो-तीन जुलाई, 1995 को गोल मार्केट इलाके में अपने मकान में पत्नी नैना साहनी की हत्या कर दी थी।
बाद में उसके शव को एक तंदूर में जलाकर नष्ट करने का प्रयास किया था। इसी वजह से यह मामला तंदूर कांड के नाम से जाना गया।