सोनिया-जेटली के बीच हो रही बातें, क्या चाहते हैं मोदी?
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नरेंद्र मोदी सरकार और कांग्रेस के बीच चल रहे टकराव और खटास को सीमा से बाहर जाने से रोकने की दिशा में दोनों तरफ से अंदरखाने सियासी डिप्लोमेसी शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि सरकार और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद के तार खुद वित्त मंत्री अरुण जेटली जोड़ रहे हैं।
कांग्रेस सूत्रों की मानें तो नेशनल हेराल्ड के झगड़े से लेकर बीमा बिल की तल्खी जैसे जटिल मुद्दों पर संवाद कायम करने के लिए जेटली की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से पिछले दिनों में कम से कम दो बार बात हुई है।
बताया जाता है कि नेशनल हेराल्ड मामले में सरकार सोनिया और राहुल के खिलाफ अपनी तरफ से आपराधिक मामले जैसी कार्रवाई की पहल नहीं करने का संकेत दे रही है। तो बीमा बिल के खिलाफ ताल ठोक रही कांग्रेस ने भी इस पर सुलह का मध्यमार्ग निकालने की बात कह आक्रामक विरोध को छोड़ने का संकेत दिया है।
कांग्रेस की अनदेखी नहीं करना चाहती सरकार
लोकसभा चुनाव में भाजपा की अब तक की सबसे बड़ी जीत के बाद मोदी सरकार के शुरुआती दिनों में ही कांग्रेस से सीधे टकराव की स्थितियां पैदा हो गई हैं। मगर संसद में महत्वपूर्ण बिलों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर राजनीतिक दलों की आम सहमति की जरूरत को देखते हुए अब एनडीए सरकार को भी विपक्ष की कीमत समझ में आने लगी है।
राज्यसभा में एनडीए के पास बहुमत नहीं होने की वजह से कांग्रेस की अनदेखी सरकार के लिए मुश्किल है। लोकसभा में विपक्ष का नेता का पद नहीं मिलने से बेचैन कांग्रेस राज्यसभा में बेहद आक्रामक दिख रही है।
सोनिया के एक करीबी कांग्रेस नेता ने कहा कि मोदी सरकार के कई बड़े मैनेजर महसूस कर रहे हैं कि कांग्रेस को खारिज नहीं किया जा सकता। शायद इसीलिए जेटली के जरिए सरकार ने सोनिया से सीधी बातचीत का दरवाजा खोलना शुरू किया है।
मोदी-सोनिया के बीच संवाद का समीकरण नहीं
कांग्रेस के इस उच्चपदस्थ सूत्र के मुताबिक बजट सत्र के दौरान पिछले कुछ दिनों में कम से कम दो मौकों पर सोनिया और जेटली की बातचीत हुई है। चूंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सोनिया गांधी के बीच सहज संवाद का वैसा सियासी समीकरण नहीं है जैसा कि पूर्ववर्ती एनडीए की सरकार के दौरान तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और सोनिया का रहा था। इसीलिए जेटली के जरिए सरकार कांग्रेस नेतृत्व से सीधा संवाद बढ़ा रही है।
सूत्रों का कहना है कि इस संवाद के दौरान ही यह संदेश दिया गया है कि नेशनल हेराल्ड मामले को ढाल बनाकर सरकार किसी तरह का बदला लेने की मूड में नहीं है। यह भी संकेत दिया गया है कि सोनिया और राहुल के खिलाफ सरकार खुद कोई आपराधिक मामला बनाने से परहेज करेगी।
वहीं, कांग्रेस ने भी बीमा बिल पर बीच का रास्ता निकालने के लिए कुछ एक संशोधन के बाद हामी भरने के लिए तैयार होने का जवाबी संदेशा दिया है। ताकि प्रधानमंत्री के रूप में सितंबर में अपनी पहली अमेरिका यात्रा पर जा रहे नरेंद्र मोदी के पास वाशिंगटन को देने के लिए कुछ रहे। बजट सत्र में बीमा बिल पास होने की गुंजाइश अब नहीं के बराबर है। पर कांग्रेस के सकारात्मक रुख के बाद पीएम के पास अमेरिका को बीमा क्षेत्र को जल्द खोलने का भरोसा देने का ठोस आधार मिल जाएगा।